संसद के विशेष सत्र से पहले महिला आरक्षण कानून में संभावित संशोधनों को लेकर राजनीतिक माहौल गरम हो गया है। विपक्ष सरकार की मंशा और सत्र की टाइमिंग पर सवाल उठा रहा है। कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी ने एक लेख में केंद्र सरकार की आलोचना करते हुए कहा कि असली मुद्दा महिला आरक्षण नहीं, बल्कि परिसीमन है।
उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार जल्दबाजी में विशेष सत्र बुलाकर राजनीतिक लाभ लेना चाहती है, खासकर तब जब कुछ राज्यों में चुनावी माहौल चरम पर है। सोनिया गांधी ने कहा कि ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ पहले ही पारित हो चुका है, लेकिन इसके लागू होने को जनगणना और परिसीमन से जोड़ दिया गया है।
उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि जनगणना में देरी से करोड़ों लोगों को लाभ से वंचित रहना पड़ा और अब परिसीमन की प्रक्रिया को तेजी से आगे बढ़ाया जा रहा है, जिससे संघीय संतुलन प्रभावित हो सकता है। उनके अनुसार, दक्षिणी और छोटे राज्यों को लोकसभा सीटों के पुनर्निर्धारण में नुकसान का खतरा है। सोनिया गांधी ने सरकार पर पारदर्शिता की कमी और U-turn लेने का आरोप लगाते हुए कहा कि बिना स्पष्ट एजेंडा और तैयारी के विशेष सत्र बुलाना लोकतांत्रिक प्रक्रिया पर सवाल खड़ा करता है। उन्होंने इसे केवल आंकड़ों का मामला नहीं बल्कि न्याय और संघीय ढांचे से जुड़ा गंभीर मुद्दा बताया।









