दिल्ली में सार्वजनिक परिवहन को अधिक पर्यावरण-अनुकूल बनाने के लिए नई पहल की जा रही है। दिल्ली परिवहन निगम (डीटीसी) अगले साल अपने बेड़े में लगभग 3500 नई इलेक्ट्रिक बसें शामिल करेगा। इससे न केवल बसों की कमी को पूरा किया जा सकेगा, बल्कि राजधानी में वायु प्रदूषण में भी उल्लेखनीय कमी आने की संभावना है।
वर्तमान में डीटीसी और क्लस्टर बसों को मिलाकर कुल 5398 वाहन परिचालन में हैं, जिनमें 3518 इलेक्ट्रिक और 1880 सीएनजी बसें शामिल हैं। अगले वर्ष सीएनजी बसों को धीरे-धीरे सड़क से हटाया जाएगा। फिलहाल डीटीसी में 149 और क्लस्टर बसों में 1731 सीएनजी बसें संचालित हो रही हैं, जिन्हें नई योजना के तहत चरणबद्ध तरीके से हटाया जाएगा।
डीटीसी ने मार्च तक लगभग 1500 अतिरिक्त इलेक्ट्रिक बसें सड़कों पर चलाने की योजना बनाई है। इसके बाद ई-बसों की संख्या 5000 के पार पहुंच जाएगी और नवंबर तक 2000 और बसें शामिल होने से यह आंकड़ा 7000 से अधिक हो जाएगा। इस कदम से राजधानी में सार्वजनिक परिवहन अधिक स्थायी और पर्यावरण-अनुकूल बनेगा।
साथ ही, दिल्ली मेट्रो रेल निगम (डीएमआरसी) फेज-4 के तीन प्राथमिकता वाले कॉरिडोर को चालू करने की तैयारी कर रहा है। मौजपुर-मजलिस पार्क कॉरिडोर पूरी तरह तैयार है। जनकपुरी पश्चिम-आरके आश्रम कॉरिडोर में दीपाली चौक से मजलिस पार्क तक 9.9 किलोमीटर का निर्माण पूरा हो चुका है। तुगलकाबाद-एरोसिटी कॉरिडोर और शेष हिस्सों का निर्माण इस वर्ष के अंत तक पूरा होने की उम्मीद है। इसके बाद फेज-4 का कुल 63.39 किलोमीटर मेट्रो नेटवर्क परिचालन में आ जाएगा। इस तरह, दिल्ली में इलेक्ट्रिक बसों और मेट्रो नेटवर्क के विस्तार से शहर के नागरिकों को बेहतर और स्वच्छ सार्वजनिक परिवहन मिलेगा, साथ ही वायु गुणवत्ता में सुधार की उम्मीद भी बढ़ेगी।









