National

बदल रहा है चांद का आकार: वैज्ञानिकों की खोज से अंतरिक्ष एजेंसियां सतर्क

चंद्रमा को लेकर हालिया वैज्ञानिक अध्ययन ने एक दिलचस्प और साथ ही चिंताजनक तथ्य सामने रखा है—हमारा प्राकृतिक उपग्रह धीरे-धीरे आकार में सिमट रहा है। शोधकर्ताओं ने चंद्र सतह पर एक हजार से अधिक नई दरारों की पहचान की है, जो इस बात का संकेत देती हैं कि चंद्रमा का आंतरिक भाग अब भी ठंडा हो रहा है और इसका प्रभाव उसकी बाहरी परत पर पड़ रहा है।

वैज्ञानिकों के अनुसार, अरबों वर्ष पहले चंद्रमा का आंतरिक भाग अत्यधिक गर्म और पिघली हुई अवस्था में था। समय के साथ यह ठंडा होकर ठोस बनता गया। जैसे-जैसे अंदरूनी तापमान कम होता है, संरचना में हल्का संकुचन होता है। इसी संकुचन के कारण सतह पर दबाव बनता है और परिणामस्वरूप दरारें तथा उभरी हुई संरचनाएं विकसित होती हैं। यह प्रक्रिया कुछ वैसी ही है जैसे सूखने पर फल सिकुड़ जाता है।

नई खोजी गई दरारें मुख्य रूप से चंद्रमा के विशाल काले मैदानों में पाई गई हैं, जिन्हें ‘लूनर मारिया’ कहा जाता है। इन संरचनाओं से संकेत मिलता है कि चंद्रमा की भूगर्भीय गतिविधियां पूरी तरह समाप्त नहीं हुई हैं। यद्यपि यह परिवर्तन अत्यंत धीमी गति से हो रहा है, फिर भी इसका प्रभाव भविष्य के मानवीय मिशनों पर पड़ सकता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सतह के नीचे ऊर्जा का संचय होता रहा, तो इससे चंद्र-भूकंप की संभावना बढ़ सकती है। आने वाले वर्षों में विभिन्न अंतरिक्ष एजेंसियां चंद्रमा पर मानव मिशन भेजने की योजना बना रही हैं। ऐसे में इन नई भूगर्भीय जानकारियों को समझना और संभावित जोखिमों का आकलन करना बेहद आवश्यक हो गया है। यह अध्ययन चंद्रमा को केवल एक शांत और निष्क्रिय पिंड मानने की धारणा को चुनौती देता है और संकेत देता है कि वहां अब भी धीमी लेकिन सक्रिय भू-प्रक्रियाएं जारी हैं।