केरल में नशे की समस्या गंभीर होती जा रही है। 2024 में राज्य में 24,517 ड्रग्स से जुड़े मामले दर्ज किए गए, जो पंजाब से भी अधिक हैं। न्यायालय ने भी इस बढ़ती समस्या पर चिंता जताई है।
ड्रग्स की बढ़ती उपलब्धता से हिंसा और अपराध में इजाफा हुआ है। स्कूलों तक नशे का प्रसार हो चुका है, जहां बच्चे तक इसकी चपेट में आ रहे हैं। पारंपरिक गांजे की बजाय अब सिंथेटिक ड्रग्स जैसे MDMA की मांग अधिक हो गई है। ड्रग्स कैंडी और आइसक्रीम में मिलाकर बेचे जा रहे हैं, जिससे माता-पिता बच्चों की जांच के लिए ड्रग टेस्ट किट खरीदने को मजबूर हो रहे हैं।
डार्क वेब और क्रिप्टोकरेंसी के जरिए ड्रग्स की खरीद-फरोख्त हो रही है। अपराधी सोशल मीडिया के माध्यम से खरीदारों से संपर्क करते हैं और डिजिटल मुद्रा के जरिए भुगतान लिया जाता है। वहीं, सुपरबाइक्स का उपयोग तेज डिलीवरी के लिए किया जा रहा है। डिलीवरी एजेंट युवा होते हैं, जो फर्जी नंबर प्लेट वाली बाइक्स से ड्रग्स पहुंचाते हैं और एक रात में हजारों रुपये तक कमा सकते हैं।
इसके अलावा, केरल की 590 किलोमीटर लंबी तटरेखा इसे ड्रग तस्करी के लिए संवेदनशील बनाती है। ड्रग्स की आपूर्ति मुख्य रूप से बेंगलुरु और चेन्नई से हो रही है।
केरल में बढ़ता नशे का जाल प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बन गया है। यदि जल्द ही सख्त कदम नहीं उठाए गए, तो सामाजिक असंतुलन और अपराध दर में और वृद्धि हो सकती है।









