नई दिल्ली | नवंबर 01, 2025
दिल्ली दंगों से जुड़े यूएपीए (UAPA) मामले में शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट में अहम सुनवाई हुई, जहां एक्टिविस्ट उमर खालिद, शरजील इमाम और गुल्फिशा फातिमा की जमानत याचिकाओं पर दो जजों की बेंच ने दलीलें सुनीं। सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने उमर खालिद की ओर से बहस करते हुए कहा, “माई लार्ड, 751 एफआईआर हैं… लेकिन मेरे मुवक्किल के खिलाफ हिंसा का कोई सबूत नहीं है।”
सिब्बल ने तर्क दिया कि उमर खालिद के खिलाफ लगाए गए “साजिश” के आरोप पूरी तरह झूठे हैं और उनके मुवक्किल ने जो भाषण अमरावती में दिया था, वह सार्वजनिक रूप से उपलब्ध है और गांधीवादी सिद्धांतों पर आधारित था। उन्होंने यह भी कहा कि दिल्ली हाईकोर्ट ने जमानत से इनकार करते हुए उस भाषण को ‘उत्तेजक’ बताया था, लेकिन भाषण में हिंसा के लिए कोई आह्वान नहीं था।
मामले की सुनवाई जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस एनवी अंजारिया की दो सदस्यीय बेंच के सामने हुई। कोर्ट ने दलीलें सुनने के बाद सुनवाई को 3 नवंबर तक के लिए टाल दिया। अदालत ने कहा कि यह गंभीर मामला है और इसे सोमवार को “पहली प्राथमिकता” के रूप में सुना जाएगा।
सुनवाई के दौरान अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एसवी राजू ने अपनी व्यस्तता का हवाला देते हुए सुनवाई आगे बढ़ाने की मांग की, लेकिन बेंच ने यह कहते हुए इंकार कर दिया कि “हमें फ्रेश सुनवाई करनी है, अपने साथियों से कहें कि सोमवार को मौजूद रहें।” अदालत के इस रुख को कई कानूनी विशेषज्ञ आने वाले समय के लिए एक “सकारात्मक संकेत” मान रहे हैं।
शरजील इमाम की ओर से वरिष्ठ वकील सिद्धार्थ दवे ने दलील दी कि पुलिस को जांच पूरी करने में तीन साल लग गए, जबकि उनके मुवक्किल ने पहले ही पांच साल जेल में बिताए हैं। उन्होंने कहा कि “जब शरजील पहले से ही 25 जनवरी 2020 से हिरासत में थे, तब उन्हें दंगों की साजिश में कैसे शामिल किया जा सकता है?”
गुल्फिशा फातिमा की पैरवी वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने की। उन्होंने अदालत से कहा कि अभियोजन पक्ष की देरी के चलते आरोपी लंबे समय से बिना सुनवाई के जेल में हैं।
अब 3 नवंबर को सुप्रीम कोर्ट इस मामले की आगे की सुनवाई करेगा, जिसमें अन्य आरोपी मीरन हैदर, मोहम्मद सलीम खान, शिफा-उर-रहमान और दिल्ली पुलिस की दलीलें पेश की जाएंगी।









