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विदेशों में भारतीय कामगारों की हालत चिंताजनक, पांच साल में 37 हजार से ज्यादा मौतें

विदेशों में काम कर रहे भारतीय श्रमिकों की स्थिति को लेकर सरकार द्वारा साझा किए गए आंकड़े गंभीर चिंता पैदा करते हैं। पिछले पांच वर्षों में औसतन हर दिन 20 से अधिक भारतीय कामगारों की विदेशों में मौत हुई है। विदेश राज्य मंत्री Kirti Vardhan Singh ने राज्यसभा में जानकारी देते हुए बताया कि 2021 से 2025 के बीच कुल 37,740 भारतीय श्रमिकों की जान गई। हालांकि, इन मौतों के कारणों का विस्तृत विवरण उपलब्ध नहीं कराया गया है।

इनमें से अधिकांश मौतें खाड़ी देशों में दर्ज की गई हैं, जहां कुल मौतों का 86 प्रतिशत से अधिक हिस्सा सामने आया। United Arab Emirates में सबसे ज्यादा 12,380 मौतें हुईं, जबकि इसके बाद Saudi Arabia, Kuwait, Oman और Qatar का स्थान रहा। आंकड़ों के अनुसार, खाड़ी क्षेत्र में अब प्रतिदिन करीब 18 भारतीय श्रमिकों की मौत हो रही है, जो 2012-2018 की तुलना में लगभग दोगुना है।

सिर्फ मौतें ही नहीं, बल्कि शोषण और उत्पीड़न की शिकायतें भी तेजी से बढ़ी हैं। पिछले पांच वर्षों में भारतीय दूतावासों को कुल 80,985 शिकायतें प्राप्त हुईं, जिनमें वेतन न मिलना, पासपोर्ट जब्त करना, अत्यधिक काम, अवकाश की कमी और नौकरी छूटने जैसी समस्याएं शामिल हैं। इनमें भी यूएई में सबसे अधिक शिकायतें दर्ज हुईं। सरकार का कहना है कि भारतीय मिशन इन मामलों में तुरंत हस्तक्षेप करते हैं और कई देशों के साथ श्रमिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए समझौते किए गए हैं, लेकिन आंकड़े अब भी हालात की गंभीरता को उजागर करते हैं।