सुप्रीम कोर्ट ने दिव्यांग (PWD) उम्मीदवारों के लिए निर्धारित अनारक्षित पदों को सभी सामाजिक वर्गों के लिए खुला घोषित करते हुए एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया। न्यायमूर्ति संजय करोल और न्यायमूर्ति एन. कोटिश्वर सिंह की पीठ ने स्पष्ट किया कि अनारक्षित श्रेणी में चयन का आधार केवल मेरिट होगा और किसी भी विशेष वर्ग (SC/ST/OBC/General) को प्राथमिकता नहीं दी जाएगी।
यह निर्णय पश्चिम बंगाल राज्य विद्युत पारेषण कंपनी लिमिटेड में जूनियर इंजीनियर भर्ती के मामले से जुड़ा था। यहां एक अनारक्षित दिव्यांग पद के लिए अधिक अंक प्राप्त करने वाले ओबीसी उम्मीदवार को नियुक्त किया गया था। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि केवल सामाजिक वर्ग के आधार पर किसी उम्मीदवार को पद से वंचित नहीं किया जा सकता।
सुप्रीम कोर्ट ने स्टांप ड्यूटी पर दंड के मामलों में भी स्पष्ट निर्देश दिए। कोर्ट ने कहा कि हाई कोर्ट कम स्टांप ड्यूटी पर जुर्माना माफ नहीं कर सकता; यह अधिकार केवल सक्षम अधिकारी के पास है।स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति को लेकर भी कोर्ट ने महत्वपूर्ण रुख अपनाया। न्यायालय ने कहा कि यह केवल नौकरी छोड़ने का कार्य नहीं, बल्कि कर्मचारी का विशेष अधिकार है, जो निर्धारित सेवा वर्ष पूरा करने पर मिलता है।
इसके अलावा, सुप्रीम कोर्ट ने बैंकों द्वारा खातों को ‘फ्रॉड’ घोषित करने से पहले अनिवार्य व्यक्तिगत सुनवाई का अधिकार देने के आदेश को रद्द कर दिया। कोर्ट ने कहा कि कर्जदार को कारण बताओ नोटिस देना और दस्तावेज उपलब्ध कराना पर्याप्त है। सुप्रीम कोर्ट ने अत्यावश्यक मामलों का उल्लेख केवल प्रधान न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष ही करने का निर्देश भी जारी किया। इस फैसले से स्पष्ट हुआ कि कानून में मेरिट, न्याय और अधिकारों का सर्वोच्च स्थान है, चाहे वह दिव्यांग उम्मीदवारों के पद, स्टांप ड्यूटी, सेवानिवृत्ति या बैंकिंग विवादों से संबंधित मामला हो।









