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सुप्रीम कोर्ट सख्त: आवारा कुत्तों के बढ़ते मामलों पर राज्यों से जवाब तलब, 7 नवंबर को नया आदेश

देशभर में आवारा कुत्तों से जुड़ी घटनाओं को लेकर सुप्रीम कोर्ट में सोमवार को अहम सुनवाई हुई। जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस एन.वी. अंजारिया की बेंच ने यह मामला सुना। पश्चिम बंगाल और तेलंगाना को छोड़कर सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य सचिव कोर्ट में उपस्थित रहे। अदालत ने कहा कि आज की सुनवाई में यह देखा जाएगा कि तीन महीने पहले दिए गए उसके आदेशों का कितना पालन हुआ है। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि अगली सुनवाई 7 नवंबर को होगी और उसी दिन इस मुद्दे पर नया आदेश जारी किया जाएगा।

कोर्ट ने सभी राज्यों से आवारा कुत्तों के नियंत्रण के लिए उठाए गए कदमों और पशु जन्म नियंत्रण (एबीसी) नियमों के पालन पर विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। साथ ही, राज्यों से सुझावों का एक सारांश चार्ट भी मांगा गया है ताकि आगे के निर्देश जारी किए जा सकें। अदालत ने कुत्तों के काटने से पीड़ित कुछ लोगों को अभियोग आवेदन दायर करने की अनुमति भी दी है।

सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि अब आगे की सुनवाई में राज्यों के मुख्य सचिवों की व्यक्तिगत उपस्थिति आवश्यक नहीं होगी। अदालत ने इस बात पर नाराजगी जताई कि उसके पहले दिए गए निर्देशों का पूरी तरह पालन नहीं किया गया। यह मामला उस स्वतः संज्ञान पर आधारित है जिसे सुप्रीम कोर्ट ने जुलाई 2025 में लिया था, जब दिल्ली में आवारा कुत्तों के हमलों और बच्चों में रेबीज संक्रमण के मामलों पर एक मीडिया रिपोर्ट सामने आई थी। अदालत का उद्देश्य देशभर में आवारा कुत्तों की समस्या पर एक समान और प्रभावी नीति बनाना है।