महाराष्ट्र की राजनीति ने शनिवार को एक ऐतिहासिक और भावुक पल देखा, जब सुनेत्रा पवार ने राज्य की पहली महिला उपमुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली। निजी जीवन के गहरे दुख और राजनीतिक जिम्मेदारियों के बीच संतुलन बनाते हुए उन्होंने यह अहम पद संभाला।
एनसीपी नेता और उनके पति अजित पवार के निधन के बाद पार्टी नेतृत्व के सामने बड़ा शून्य खड़ा हो गया था। ऐसे समय में पार्टी ने सुनेत्रा पवार पर भरोसा जताया और उन्हें उपमुख्यमंत्री पद की जिम्मेदारी सौंपी। गहन विचार-विमर्श के बाद उन्होंने इस प्रस्ताव को स्वीकार किया, जिसे पार्टी के भविष्य और संगठन की स्थिरता के लिए जरूरी माना गया।
शपथ ग्रहण समारोह महाराष्ट्र लोकभवन में आयोजित हुआ, जहां राज्यपाल ने उन्हें पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। इस मौके पर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और एनसीपी के कई विधायक मौजूद रहे। समारोह के दौरान समर्थकों ने ‘अजित दादा अमर रहें’ के नारे लगाकर दिवंगत नेता को श्रद्धांजलि दी। पद संभालने से पहले सुनेत्रा पवार ने अपने राज्यसभा सांसद पद से इस्तीफा दे दिया, ताकि वह पूरी तरह राज्य की राजनीति और प्रशासनिक जिम्मेदारियों पर ध्यान केंद्रित कर सकें। शपथ से पहले पार्टी विधायकों ने सर्वसम्मति से उन्हें अपना नेता चुना।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सुनेत्रा पवार का नेतृत्व एनसीपी के लिए नए दौर की शुरुआत साबित हो सकता है। एक तरफ निजी क्षति का दर्द, तो दूसरी ओर राज्य के विकास की जिम्मेदारी — इन दोनों के बीच उन्होंने जिस दृढ़ता से कदम बढ़ाया है, वह उन्हें राज्य की राजनीति में एक मजबूत और संवेदनशील नेता के रूप में स्थापित करता है। महाराष्ट्र की पहली महिला डिप्टी सीएम के रूप में उनका यह सफर न केवल व्यक्तिगत साहस की मिसाल है, बल्कि राज्य की राजनीति में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी का भी प्रतीक बन गया है।









