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शेख हसीना ने तारिक रहमान के भारत दौरे से दूरी बनाने पर उठाए सवाल, राष्ट्रीय हितों का दिया हवाला

बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने तारिक रहमान के नई दिल्ली में आयोजित बैठकों में शामिल न होने के फैसले पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने इसे बांग्लादेश के राष्ट्रीय हितों के विपरीत बताते हुए कहा कि भारत में उनकी मौजूदगी किसी बांग्लादेशी नेता के दौरे में बाधा क्यों बननी चाहिए। 14 अक्टूबर को दिए एक इंटरव्यू में हसीना ने 1979 की घटना का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि उस समय तारिक रहमान के पिता और बांग्लादेश के पूर्व राष्ट्रपति जियाउर रहमान भारत आए थे, जबकि वह खुद दिल्ली में रह रही थीं। हसीना के मुताबिक, उनकी मौजूदगी ने जियाउर रहमान की यात्रा को प्रभावित नहीं किया था। उन्होंने यह भी याद दिलाया कि 1980 में जियाउर रहमान के लंदन दौरे के दौरान भी वह वहीं थीं।

यह बयान ऐसे समय आया है, जब भारत और बांग्लादेश के संबंधों में तनाव बना हुआ है। रिपोर्ट के अनुसार, बांग्लादेश ने सितंबर में हुए ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में हिस्सा नहीं लिया था। वहीं, 13 अक्टूबर को नई दिल्ली में आयोजित पहली बिम्सटेक गृह मंत्रियों की बैठक में बांग्लादेश के गृह मंत्री सलाहुद्दीन अहमद भी शामिल नहीं हुए। इन बैठकों से बांग्लादेश के प्रमुख नेताओं की दूरी को लेकर उसके राजनयिक रुख पर सवाल उठ रहे हैं। हसीना अगस्त 2024 से भारत में रह रही हैं। बांग्लादेश की मौजूदा सरकार ने उनके प्रत्यर्पण की मांग की है और उनकी भारत में मौजूदगी को द्विपक्षीय संबंधों में बाधा बताया है। दूसरी ओर, हसीना ने दिसंबर 2026 तक बांग्लादेश लौटने का संकल्प जताया है। रिपोर्ट के मुताबिक, नवंबर 2025 में बांग्लादेश के इंटरनेशनल क्राइम्स ट्रिब्यूनल ने उन्हें उनकी अनुपस्थिति में मौत की सजा सुनाई थी। यह फैसला 2024 के विरोध प्रदर्शनों के दौरान हुई हिंसा से जुड़े मानवता के खिलाफ अपराधों के मामले में दिया गया था।