ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती मौनी अमावस्या को गंगा स्नान से रोके जाने के विरोध में अनशन पर बैठे हैं। शंकराचार्य ने कहा कि प्रशासन और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देशों के तहत उनके साथ भेदभाव किया गया और उनके समर्थकों के साथ दुर्व्यवहार हुआ।
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने टीवी9 भारतवर्ष से बातचीत में बताया कि मौनी अमावस्या पर अन्य संतों को वीआईपी व्यवस्था के तहत स्नान की अनुमति दी गई, जबकि उन्हें रोक दिया गया। उनके समर्थकों के साथ धक्का-मुक्की भी हुई। शंकराचार्य ने इसे प्रशासन की गंदी राजनीति और अन्य संतों के प्रति पक्षपात करार दिया।
अनशन पर बैठे शंकराचार्य ने आरोप लगाया कि उनके जीवन को खतरा भी पैदा किया गया। उन्होंने कहा कि प्रशासन के कथित व्यवहार के कारण उन्हें मारने की साजिश रची गई थी। इसके अलावा, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि बैरिकेड तोड़ने के आरोप उनके समर्थकों पर सही नहीं बैठते।
मौनी अमावस्या पर विवाद की शुरुआत तब हुई, जब शंकराचार्य और उनके भक्तों को पालकी और भीड़ के साथ गंगा स्नान की अनुमति नहीं मिली। प्रशासन ने सुरक्षा और भीड़ नियंत्रण का हवाला देते हुए कम संख्या में पैदल स्नान की पेशकश की, लेकिन शंकराचार्य ने इसे अस्वीकार कर दिया। विवाद के बाद उन्हें वापस लौटाया गया और तभी से उन्होंने त्रिवेणी रोड, सेक्टर चार, माघ मेले में स्थित अपने शिविर में अनशन शुरू किया। शंकराचार्य ने प्रशासन से अपनी मांग दोहराई है कि उन्हें प्रोटोकॉल के तहत गंगा स्नान की अनुमति दी जाए। उन्होंने कहा कि प्रशासन का रवैया संत परंपरा और श्रद्धालुओं के प्रति उचित नहीं है।









