बुधवार को भारतीय रुपये के लिए दिन काफी नकारात्मक रहा। डॉलर के मुकाबले रुपया दिनभर दबाव में रहा और 91.73 के स्तर पर बंद हुआ, जो अब तक का सबसे निचला स्तर माना जा रहा है। इस गिरावट के कारण निवेशक हैरान हैं। केवल इस महीने में ही रुपये की कीमत में लगभग 1.50% की गिरावट दर्ज की गई है, जो आर्थिक दृष्टि से चिंता का विषय है।
विशेषज्ञों का कहना है कि विदेशी निवेशकों का भारत से पैसा निकालना रुपये की कमजोरी का मुख्य कारण है। इसके अलावा, यूरोप में ग्रीनलैंड विवाद और अमेरिका-यूरोप के बीच तनाव ने वैश्विक बाजार में अनिश्चितता पैदा की है, जिससे डॉलर की मांग बढ़ गई है। अमेरिका और वेनेजुएला के तेल को लेकर वैश्विक व्यापार पर भी असर पड़ा है।
हालांकि भारतीय रिजर्व बैंक के पास पर्याप्त विदेशी मुद्रा भंडार है, जिससे जरूरत पड़ने पर वह रुपये को स्थिर करने के लिए हस्तक्षेप कर सकता है। कच्चे तेल की कीमतों में कमी कुछ राहत दे सकती है, लेकिन तब तक रुपये पर दबाव बना रह सकता है जब तक वैश्विक अनिश्चितताएं कम नहीं होतीं। शेयर बाजार में भी कमजोर रुपया और विदेशी निवेशकों की बिकवाली के कारण गिरावट दर्ज की गई।









