देश में महंगाई दर अब तक के सबसे निचले स्तरों में से एक पर पहुंच गई है. सितंबर 2025 में उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) आधारित खुदरा महंगाई घटकर 1.54% रह गई, जो जून 2017 के बाद सबसे कम है. यह गिरावट मुख्य रूप से सब्जियों और दालों जैसी आवश्यक वस्तुओं की कीमतों में तेज गिरावट और 22 सितंबर से लागू जीएसटी राहत का असर मानी जा रही है.
राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO) द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, खाद्य महंगाई दर भी शून्य से नीचे पहुंच गई है. सितंबर में यह -2.28% रही, जो दिसंबर 2018 के बाद सबसे न्यूनतम स्तर है. अगस्त में यह -0.64% थी. सब्जियों के दाम साल भर में 21.38% और दालों के दाम 15.32% घटे. वहीं, अनाज, अंडे, दूध और मसालों की कीमतों में भी हल्की गिरावट दर्ज की गई. हालांकि, खाद्य तेलों में 18.34% और फलों में 9.93% की वृद्धि देखी गई.
आरबीआई ने भी खुदरा मुद्रास्फीति के अनुमानों को संशोधित करते हुए पूरे वित्त वर्ष के लिए इसे घटाकर 2.6% किया है. आरबीआई का मानना है कि संतुलित जीएसटी दरों और बेहतर मानसून के चलते महंगाई पर नियंत्रण संभव हुआ है, जिससे उपभोग और आर्थिक वृद्धि को बल मिला है.
जीएसटी दरों में कटौती और बेहतर आपूर्ति श्रृंखला ने उपभोक्ताओं को राहत दी है. आने वाले महीनों में भी कीमतें स्थिर रहने की उम्मीद है. यह गिरावट उपभोक्ताओं और नीति निर्माताओं दोनों के लिए सकारात्मक संकेत है, जिससे आर्थिक संतुलन मजबूत हो सकता है.









