केंद्र सरकार ने दूरसंचार विभाग (DoT) की SIM बाइंडिंग गाइडलाइन को लागू करने की समयसीमा को 31 दिसंबर तक के लिए टाल दिया है। इसका सीधा असर यह हुआ कि अब WhatsApp और Telegram जैसे मैसेजिंग ऐप्स बिना एक्टिव SIM के भी काम करेंगे और उनके वेब वर्जन से यूजर्स अपने आप लॉग आउट नहीं होंगे।
पहले यह नियम 30 मार्च से लागू होना था। इसके तहत मैसेजिंग ऐप्स केवल उसी डिवाइस पर सेवा देंगे जिसमें एक्टिव SIM मौजूद हो। इसके अलावा, वेब वर्जन पर अकाउंट 6 घंटे में अपने आप लॉग आउट हो जाता। यह कदम साइबर धोखाधड़ी और डिजिटल फ्रॉड को रोकने के लिए उठाया गया था, क्योंकि SIM हटाए जाने के बावजूद ऐप्स काम कर रहे थे, जिससे साइबर अपराधियों को फायदा मिल रहा था।
हालांकि, तकनीकी और व्यावहारिक चुनौतियों के कारण कंपनियों को अब अनुपालन के लिए समय मिला है। Apple ने पहले ही इस नियम पर ऐतराज जताया था और कहा था कि SIM बाइंडिंग तकनीकी रूप से कठिनाईपूर्ण है। अब इस असुविधा के कारण यूजर्स बिना SIM के भी अपने मैसेजिंग ऐप्स और वेब वर्जन का लगातार इस्तेमाल कर पाएंगे।
दूरसंचार विभाग ने पिछले साल नवंबर में यह गाइडलाइन जारी की थी। विभाग ने बड़े ऐप-बेस्ड कम्युनिकेशन प्लेटफॉर्म्स को निर्देश दिया था कि वे अपनी सर्विस को 26 फरवरी से एक्टिव SIM से जोड़कर रखें और 28 मार्च तक कम्प्लायंस रिपोर्ट जमा करें। सरकार ने यह कदम साइबर फ्रॉड को रोकने और सुरक्षा गैप को पाटने के लिए उठाया था।
अब तक यूजर्स के लिए यह राहत की खबर है कि उनके WhatsApp और Telegram अकाउंट बिना SIM भी चालू रहेंगे और वेब लॉगिन में कोई बाधा नहीं आएगी। कंपनियों को साल के अंत तक इस गाइडलाइन का पालन करने के लिए अतिरिक्त समय मिला है।









