मुंबई उच्च न्यायालय ने अनिल अंबानी और उनकी कंपनी रिलायंस कम्युनिकेशंस लिमिटेड (आरकॉम) के खातों को फ्रॉड अकाउंट घोषित करने की मांग कर रहे तीन बैंकों की सभी वर्तमान और भविष्य की कार्रवाइयों पर रोक लगा दी है। अदालत ने पाया कि यह कार्रवाई बाहरी ऑडिटर बीडीओ एलएलपी द्वारा तैयार फोरेंसिक ऑडिट रिपोर्ट पर आधारित थी, जिस पर भरोसा नहीं किया जा सकता क्योंकि यह भारतीय रिजर्व बैंक के 2024 के मास्टर दिशा-निर्देशों के तहत आवश्यक सीए हस्ताक्षर के बिना तैयार की गई थी।
न्यायमूर्ति मिलिंद जाधव ने कहा कि अगर अंतरिम राहत नहीं दी जाती, तो इससे अनिल अंबानी और आरकॉम को अपूरणीय नुकसान हो सकता है। अदालत ने बैंकों की विलंबित कार्रवाई की भी आलोचना की, क्योंकि उन्होंने 2013-2017 की अवधि के लिए 2019 में फोरेंसिक ऑडिट कराने की पहल की थी।
इससे पहले, अनिल अंबानी ने इंडियन ओवरसीज बैंक, आईडीबीआई और बैंक ऑफ बड़ौदा द्वारा जारी कारण बताओ नोटिस को चुनौती दी थी। वहीं, रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर के शेयरों पर IBC के तहत स्टेज-1 IRP कारण ट्रेडिंग रोक लगी हुई है। पिछले 52 हफ्तों में शेयर ₹127.95 से ₹425 के बीच रहा है, वर्तमान कीमत ₹173.45 है। अदालत का यह आदेश अनिल अंबानी और आरकॉम के लिए राहत साबित हुआ है।









