रॉयटर्स के ताज़ा सर्वे के अनुसार, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) अगले लंबे समय तक रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं कर सकता। 8 अप्रैल की बैठक में केंद्रीय बैंक रेपो रेट 5.25% पर बनाए रखने की संभावना है। सर्वे में शामिल 71 अर्थशास्त्रियों में से केवल 2 ने ही ब्याज दर बढ़ाने या घटाने की सलाह दी। भारत में महंगाई पिछले एक साल से RBI के 4% लक्ष्य के नीचे बनी हुई है, जबकि आर्थिक वृद्धि भी मजबूत बनी हुई है। यही कारण है कि RBI फिलहाल ब्याज दर को स्थिर रखने के पक्ष में है।
हालांकि, अमेरिका-इज़राइल और ईरान के बीच जारी तनाव ने वैश्विक तेल बाजार में अनिश्चितता बढ़ा दी है। तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव महंगाई को प्रभावित कर सकते हैं, जिससे भारत जैसी तेल आयातक अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि फिलहाल महंगाई संतुलित है और अर्थव्यवस्था तेल की कीमतों के उतार-चढ़ाव को झेल सकती है। लेकिन अगले दो वित्त वर्षों में महंगाई औसतन 4.3% और आर्थिक वृद्धि लगभग 7% रहने का अनुमान है। 2026-27 में धीमी वृद्धि और बढ़ती महंगाई का मेल RBI के लिए चुनौतीपूर्ण साबित हो सकता है।









