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RBI की सख्ती से बैंकिंग शेयरों पर दबाव, 95 अरब डॉलर घटा मार्केट कैप

भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) की हालिया कड़ी मौद्रिक नीति और रुपये को संभालने के प्रयासों का असर बैंकिंग शेयरों पर दिखने लगा है। पिछले कुछ हफ्तों में भारतीय बैंकों की मार्केट वैल्यू करीब 95 अरब डॉलर घट गई है। विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले समय में यह दबाव और बढ़ सकता है। रुपये को रिकॉर्ड निचले स्तर पर जाने से रोकने के लिए केंद्रीय बैंक ने बाजार में डॉलर बेचकर हस्तक्षेप किया। इस कदम से बैंकिंग सिस्टम में नकदी की उपलब्धता प्रभावित हुई है, जिससे बैंकों की कर्ज देने की क्षमता और मुनाफे पर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है। आंकड़ों के मुताबिक मार्च के पहले 15 दिनों में विदेशी निवेशकों ने वित्तीय कंपनियों के शेयरों से लगभग 327 अरब रुपये (करीब 3.5 अरब डॉलर) निकाल लिए। इसी दौरान बैंकिंग इंडेक्स में तेज गिरावट दर्ज की गई और यह बियर मार्केट की सीमा (20% गिरावट) के करीब पहुंच गया।

विशेषज्ञों का कहना है कि मौद्रिक नीति सख्त बने रहने से बैंकिंग स्टॉक्स पर दबाव जारी रह सकता है। क्रांति बथिनी के अनुसार, हालांकि शेयरों के गिरने के बाद उनके वैल्यूएशन आकर्षक हो गए हैं, जो लंबी अवधि के निवेशकों के लिए अवसर भी बन सकते हैं। बैंकिंग शेयर भारतीय शेयर बाजार का लगभग एक-तिहाई हिस्सा हैं। इसलिए इस सेक्टर में कमजोरी बनी रहती है तो इसका व्यापक बाजार पर भी असर पड़ सकता है। हालांकि कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि भारत की मजबूत आर्थिक वृद्धि दर के कारण बैंकिंग सेक्टर लंबी अवधि में फिर से संभल सकता है। फिलहाल बैंकिंग इंडेक्स लगभग 1.5 गुना वन-ईयर फॉरवर्ड प्राइस-टू-बुक पर ट्रेड कर रहा है, जो 2020 के बाद के निचले स्तरों में है। Citibank ने सरकारी बैंकों की तुलना में निजी बैंकों को प्राथमिकता देना शुरू किया है।

भविष्य के लिए चेतावनी भी जारी है। Jefferies का अनुमान है कि करेंसी ट्रेड्स के कारण बैंकों को लगभग 50 अरब रुपये का नुकसान हो सकता है। वहीं Fitch Ratings के अनुसार, सख्त वित्तीय हालात से बैंकों का नेट इंटरेस्ट मार्जिन 20-30 बेसिस प्वाइंट तक घट सकता है। रजत अग्रवाल ने कहा कि हाल की तेज क्रेडिट ग्रोथ पर वैश्विक तनाव और युद्ध जैसे कारक भी असर डाल सकते हैं। कुल मिलाकर, आरबीआई की सख्ती, विदेशी निवेश की निकासी और वैश्विक अनिश्चितताओं के चलते बैंकिंग सेक्टर पर निकट भविष्य में दबाव बना रह सकता है। हालांकि लंबी अवधि के निवेशकों के लिए यह गिरावट अवसर भी बन सकती है।