रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने गुजरात के बड़ौदा में कहा कि भारत के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू सरकारी फंड से अयोध्या में बाबरी मस्जिद बनवाने का प्रयास कर रहे थे। उन्होंने बताया कि इसे रोकने का काम सरदार वल्लभभाई पटेल ने किया, जिन्हें भारत की एकता का संरक्षक बताया। सिंह ने पटेल की दूरदर्शिता, धर्मनिरपेक्षता और निष्पक्षता की जमकर तारीफ की।
उन्होंने कहा कि नेहरू ने सोमनाथ मंदिर के मामले में अलग दृष्टिकोण रखा, लेकिन पटेल ने साफ किया कि मंदिर का पुनर्निर्माण जनता के दान से हुआ, इसलिए यह अलग मामला था। सिंह ने यह भी कहा कि पटेल प्रधानमंत्री बन सकते थे, लेकिन उन्होंने पद के लिए कभी लालच नहीं दिखाया। नेहरू कांग्रेस अध्यक्ष बने क्योंकि गांधीजी की सलाह पर पटेल ने अपना नाम वापस लिया।
रक्षा मंत्री ने सरदार पटेल की रणनीति और नेतृत्व का भी वर्णन किया, जिन्होंने स्वतंत्र भारत के 500 से अधिक रियासतों को एकीकृत किया। उन्होंने कहा कि पटेल में चाणक्य की कूटनीति और शिवाजी महाराज का साहस था, जिसकी वजह से आज भारत एकजुट है। सिंह ने पटेल की विरासत को फिर से उजागर करने में प्रधानमंत्री मोदी की भूमिका की भी सराहना की।









