लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने स्पीकर ओम बिरला को पत्र लिखकर आरोप लगाया है कि उन्हें सरकार के दबाव में सदन में बोलने से रोका जा रहा है। उन्होंने कहा कि यह कदम लोकतांत्रिक परंपराओं के खिलाफ है और इससे विपक्ष के अधिकारों का हनन हो रहा है।
राहुल गांधी ने राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव की चर्चा के दौरान पूर्व सेना प्रमुख एम.एम. नरवणे के अप्रकाशित संस्मरण से जुड़े एक लेख का हवाला देते हुए चीन से संबंधित मुद्दा उठाने की कोशिश की थी, लेकिन उन्हें इसकी अनुमति नहीं दी गई। उनका कहना है कि उन्होंने नियमानुसार दस्तावेज को सत्यापित कर उसकी जिम्मेदारी भी ली थी, फिर भी बोलने का मौका नहीं दिया गया।
कांग्रेस नेता ने पत्र में लिखा कि संसदीय परंपरा के मुताबिक, दस्तावेज सत्यापित होने के बाद सदस्य को अपनी बात रखने की छूट मिलनी चाहिए और जवाब देना सरकार की जिम्मेदारी होती है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण विषय पर उन्हें रोकना गंभीर चिंता का विषय है। राहुल ने इसे लोकतंत्र के लिए दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कड़ा विरोध दर्ज कराया है।









