कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने केंद्र सरकार द्वारा प्रस्तावित ‘जी राम जी’ बिल को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर कड़ा हमला बोला है। उनका कहना है कि यह कदम न केवल महात्मा गांधी के विचारों के विपरीत है, बल्कि ग्रामीण गरीबों की आजीविका पर भी सीधा प्रहार है। राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि सरकार मनरेगा को कमजोर करने और धीरे-धीरे खत्म करने की दिशा में आगे बढ़ रही है।
राहुल गांधी ने कहा कि महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना, जिसे वर्ष 2005 में यूपीए सरकार के दौरान लागू किया गया था, करोड़ों ग्रामीण परिवारों के लिए जीवनरेखा साबित हुई है। कोविड महामारी के समय इस योजना ने गांवों में रहने वाले गरीबों को आर्थिक सुरक्षा दी थी। इसके बावजूद मौजूदा सरकार लगातार इसे कमजोर करने की कोशिश कर रही है।
उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि प्रधानमंत्री मोदी को दो बातों से विशेष आपत्ति है—महात्मा गांधी के विचार और गरीबों के अधिकार। राहुल गांधी का आरोप है कि 2014 के बाद से गांधी के नाम से जुड़ी योजनाओं को या तो बदला गया या उनकी मूल भावना को खत्म किया गया। अब मनरेगा के स्वरूप में बदलाव कर इसकी आत्मा पर ही चोट की जा रही है।
राहुल गांधी के अनुसार, मनरेगा की मूल अवधारणा रोजगार के अधिकार, गांवों को अपने विकास कार्य तय करने की आज़ादी और केंद्र सरकार द्वारा मजदूरी का पूरा खर्च वहन करने पर आधारित थी। लेकिन नए प्रस्ताव में बजट और नियमों पर पूरा नियंत्रण केंद्र के हाथ में रहेगा, राज्यों पर ज्यादा वित्तीय बोझ डाला जाएगा और कई महीनों तक मजदूरों को काम नहीं मिलने की आशंका है।
कांग्रेस नेता ने कहा कि देश पहले ही गंभीर बेरोजगारी की समस्या से जूझ रहा है और युवाओं का भविष्य खतरे में है। ऐसे समय में अगर ग्रामीण इलाकों में रोजगार की गारंटी भी छीनी गई, तो इसका सबसे ज्यादा नुकसान गरीब परिवारों को होगा। राहुल गांधी ने साफ किया कि कांग्रेस इस प्रस्तावित बिल का हर स्तर पर विरोध करेगी और गांवों से लेकर संसद तक इसकी खिलाफत जारी रखेगी।









