Punjab

सीएम भगवंत मान को पंजाब केसरी समूह का पत्र, सरकार पर लगाया प्रेस को डराने और कार्रवाई करने का आरोप

पंजाब की राजनीति में उस समय हलचल तेज हो गई जब प्रतिष्ठित मीडिया समूह पंजाब केसरी ने मुख्यमंत्री भगवंत मान को एक विस्तृत पत्र भेजकर राज्य सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। समूह का कहना है कि आम आदमी पार्टी से जुड़ी खबरों में निष्पक्ष रिपोर्टिंग के बाद उसे सरकारी एजेंसियों के जरिए लगातार निशाना बनाया जा रहा है। पत्र पर विजय कुमार चोपड़ा, अविनाश चोपड़ा और अमित चोपड़ा के हस्ताक्षर हैं।

पत्र में दावा किया गया है कि बीते कुछ हफ्तों में समूह से जुड़ी इकाइयों—खासतौर पर जालंधर और लुधियाना के होटलों व प्रिंटिंग प्रेसों—पर विभिन्न विभागों द्वारा एक के बाद एक छापेमारी की गई। इनमें खाद्य सुरक्षा, जीएसटी, आबकारी, कारखाना विभाग और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की कार्रवाइयों का उल्लेख है। साथ ही यह भी कहा गया है कि कुछ स्थानों पर बिजली कनेक्शन काटे गए और प्रेस परिसरों के बाहर भारी पुलिस बल तैनात किया गया, जिससे कामकाज बाधित होने की स्थिति पैदा हुई।

पंजाब केसरी समूह का आरोप है कि यह सिलसिला उस खबर के बाद शुरू हुआ जिसमें सत्तारूढ़ दल के राष्ट्रीय नेतृत्व से जुड़े मुद्दों पर विपक्ष के आरोपों को संतुलित ढंग से प्रकाशित किया गया था। समूह का यह भी कहना है कि राज्य सरकार ने पहले विज्ञापनों पर रोक लगाकर आर्थिक दबाव बनाया और अब लगातार निरीक्षण व छापेमारी के जरिए डराने की कोशिश हो रही है। पत्र में मुख्यमंत्री से इस पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच कराने और मीडिया की स्वतंत्रता सुनिश्चित करने की अपील की गई है।

उधर, राज्य सरकार ने सभी आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि संबंधित कार्रवाइयाँ किसी मीडिया संस्थान को निशाना बनाने के लिए नहीं, बल्कि गंभीर वैधानिक उल्लंघनों के आधार पर की गई हैं। सरकार के अनुसार, आबकारी, श्रम और पर्यावरण नियमों से जुड़े मामलों में औपचारिक जांच के बाद नोटिस और आदेश जारी किए गए, जिनका पत्रकारिता या संपादकीय रुख से कोई संबंध नहीं है। इस मुद्दे पर विपक्षी दलों ने सरकार को घेरते हुए प्रेस की आजादी पर खतरे की बात कही है और राज्यपाल से हस्तक्षेप की मांग की है। पूरे घटनाक्रम ने राज्य में मीडिया की स्वतंत्रता और सरकारी नियामक कार्रवाइयों की सीमाओं को लेकर नई बहस छेड़ दी है।