पंजाब में किलोमीटर स्कीम से जुड़ी बसों के टेंडर को रद्द किए जाने के खिलाफ शुक्रवार सुबह शुरू हुए व्यापक विरोध प्रदर्शन का असर पूरे प्रदेश में देखने को मिला। PRTC और पनबस के अस्थायी कर्मचारियों ने कई जिलों में बस सेवाएं ठप कर दीं, जिसके चलते बस स्टैंडों पर अफरा-तफरी का माहौल रहा। लुधियाना में बस स्टैंड के मुख्य द्वार बंद कर दिए गए, जिसके बाद कर्मचारियों और पुलिस के बीच धक्का-मुक्की तक की नौबत आ गई। कुछ प्रदर्शनकारी पानी की टंकी पर चढ़कर भी विरोध जताते दिखे।
उग्र होते हालात के बीच पंजाब सरकार ने त्वरित और सख्त कदम उठाया। हड़ताल में शामिल सभी अस्थायी कर्मचारियों को निलंबित करने का आदेश जारी कर दिया गया है। विभाग ने प्रत्येक कर्मचारी को ई-मेल के जरिए कार्रवाई की सूचना भेजी है, जिसमें कहा गया है कि गैरकानूनी धरने में शामिल होकर कर्मचारियों ने सरकारी कामकाज बाधित किया और वित्तीय क्षति पहुंचाई। रूट पर निर्धारित बसें न चलाने के चलते सभी पर जुर्माना भी लगाया गया है।
जालंधर क्षेत्रीय दफ्तर–1 की ओर से जारी पत्र में चार कर्मचारियों के खिलाफ विशेष रूप से कार्रवाई दर्ज की गई है। विभाग ने बताया कि इन कर्मचारियों द्वारा बसें निर्धारित रूट पर न चलाने के कारण सरकार को 21,459 रुपये का नुकसान हुआ, जिसे वित्तीय अनियमितता माना गया है। इसी आधार पर तात्कालिक प्रभाव से सभी संबंधित कर्मचारियों को सेवा से निलंबित करने के आदेश दिए गए हैं।
सरकार ने स्पष्ट किया है कि बस सेवाओं के बाधित होने से आम जनता को भारी असुविधा हुई और राजस्व को भी बड़ा नुकसान पहुंचा। ऐसे में किसी भी तरह की गैरकानूनी हड़ताल या अव्यवस्थित धरना बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।









