पाक अधिकृत कश्मीर (PoK) में बीते तीन दिनों से जारी विरोध-प्रदर्शन अब उग्र रूप ले चुके हैं. स्थानीय लोगों की बुनियादी मांगों को लेकर शुरू हुआ यह आंदोलन अब पाकिस्तानी सेना और प्रशासन की ज्यादतियों के खिलाफ जनआंदोलन बन गया है. प्रदर्शनकारियों पर पाकिस्तानी सुरक्षा बलों की फायरिंग में अब तक कम से कम 12 नागरिकों की मौत हो चुकी है, जबकि 200 से अधिक लोग घायल हैं. मृतकों में मुजफ्फराबाद, धीरकोट और डडियाल के निवासी शामिल हैं. झड़पों में तीन पुलिसकर्मियों की भी जान गई है.
प्रदर्शनकारियों को काबू में करने के लिए सुरक्षा बलों ने गोलियां और आंसू गैस के गोले दागे. गंभीर रूप से घायल कई लोगों की हालत नाजुक बताई जा रही है. अस्पतालों में भीड़ के चलते इलाज में कठिनाई हो रही है, जिससे हालात और बिगड़ते जा रहे हैं. इस आंदोलन की अगुवाई जम्मू-कश्मीर संयुक्त अवामी एक्शन कमेटी (AAC) कर रही है. लोग पाकिस्तान में रह रहे कश्मीरी शरणार्थियों के लिए आरक्षित पीओके की 12 विधानसभा सीटों को समाप्त करने की मांग कर रहे हैं. 29 सितंबर से बाजार, दुकानें और सभी व्यावसायिक गतिविधियां बंद हैं. संचार सेवाएं भी पूरी तरह ठप कर दी गई हैं. यूकेपीएनपी प्रवक्ता नासिर अजीज खान ने संयुक्त राष्ट्र और अंतर्राष्ट्रीय समुदाय से इस संकट पर तत्काल हस्तक्षेप की अपील की है. विश्लेषकों के अनुसार, यह PoK में हाल के वर्षों का सबसे बड़ा जनआंदोलन बन चुका है.









