Punjab

PRTC–PUNBUS ठेका कर्मियों का अल्टीमेटम, मांगें न मानी गईं तो पंजाब में तेज होगा आंदोलन

पंजाब रोडवेज पनबस और पीआरटीसी के ठेका कर्मचारियों ने एक बार फिर सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। कर्मचारियों का कहना है कि लंबे समय से उनकी मांगों को नजरअंदाज किया जा रहा है और निजीकरण को बढ़ावा दिया जा रहा है, जिससे विभाग और कर्मचारियों दोनों का भविष्य खतरे में पड़ गया है। इसी के चलते यूनियन ने चेतावनी दी है कि यदि 28 जनवरी को होने वाली बैठक में कोई ठोस समाधान नहीं निकला तो राज्यभर में चक्का जाम, पक्के धरने और मुख्यमंत्री आवास के सामने प्रदर्शन किए जाएंगे।

लुधियाना के इसरू भवन में हुई राज्य स्तरीय बैठक में यूनियन नेताओं ने आंदोलन की अगली रणनीति तय की। बैठक में सीटू के राज्य महासचिव महा सिंह रोड़ी विशेष रूप से शामिल हुए। यूनियन के संरक्षक कमल कुमार, चेयरमैन बलविंदर सिंह राठ और राज्य प्रधान रेशम सिंह गिल समेत कई पदाधिकारियों ने सरकार पर कर्मचारियों के अधिकारों की अनदेखी का आरोप लगाया।

यूनियन ने यह भी कहा कि आंदोलन के दौरान दर्ज मामलों के चलते कई पदाधिकारी पिछले करीब दो महीने से जेल में हैं, जिनकी रिहाई की मांग की जा रही है। नेताओं का कहना है कि लोकतंत्र में विरोध दर्ज कराना नागरिकों का अधिकार है, लेकिन सरकार दबाव बनाकर आवाज को कुचलने का प्रयास कर रही है।

कर्मचारियों ने किलोमीटर स्कीम के तहत लगातार टेंडर निकालने पर भी आपत्ति जताई और दावा किया कि इससे निजी कंपनियों को फायदा पहुंचाया जा रहा है जबकि विभाग को नुकसान हो रहा है। उनका कहना है कि मुफ्त यात्रा योजना के बदले पनबस और पीआरटीसी को सरकार से बड़ी राशि मिलनी है, लेकिन भुगतान न होने से वेतन देने तक में मुश्किलें आ रही हैं।

यूनियन पदाधिकारियों ने ठेका प्रथा को कर्मचारियों के शोषण और बेरोजगारी बढ़ने का कारण बताया। उनका कहना है कि निजीकरण से किराए बढ़ेंगे और इसका सीधा बोझ आम जनता पर पड़ेगा। आंदोलन की रूपरेखा के तहत 26 जनवरी को सभी डिपो पर गेट रैलियां होंगी। इसके बाद 9 फरवरी को फिर गेट रैलियां, 11 फरवरी को डिपो स्तर पर बस सेवाएं ठप करने और 12 फरवरी को मुख्यमंत्री आवास के बाहर धरने का ऐलान किया गया है। यूनियन ने साफ कहा है कि अगर हालात बिगड़ते हैं तो इसकी जिम्मेदारी सरकार और प्रबंधन की होगी।