Jammu & Kashmir

आतंक पर नकेल कसने की तैयारी: जम्मू-कश्मीर की ऊंची चोटियों पर 43 नए सुरक्षा ठिकाने स्थापित

पिछले कुछ महीनों में सुरक्षा बलों ने आतंकवाद से निपटने के लिए नई और सख्त रणनीति अपनाई है, खासकर जम्मू और कश्मीर के दुर्गम पहाड़ी क्षेत्रों में। अप्रैल 2025 में हुए पहलगाम हमले के बाद सुरक्षा तंत्र को और मजबूत करने पर जोर दिया गया है। इसी कड़ी में सेना और सेंट्रल रिज़र्व पुलिस फाॅर्स ने मिलकर 6,000 फीट से अधिक ऊंचाई वाले इलाकों में 43 अस्थायी ऑपरेटिंग ठिकाने स्थापित किए हैं।

इन नए ठिकानों का मुख्य उद्देश्य सीमावर्ती और दुर्गम इलाकों में लगातार निगरानी रखना और आतंकियों की घुसपैठ की कोशिशों को नाकाम करना है। इन बेस को आधुनिक सर्विलांस उपकरणों, ड्रोन तकनीक और तेज प्रतिक्रिया टीमों से लैस किया गया है, जिससे खुफिया जानकारी को तुरंत साझा किया जा सके। खास तौर पर कुपवाड़ा, राजौरी, पुंछ और डोडा जैसे संवेदनशील जिलों में सुरक्षा घेरा मजबूत किया गया है।

अधिकारियों का मानना है कि आतंकवादी अब पकड़े जाने से बचने के लिए ऊंचे और मुश्किल रास्तों का इस्तेमाल कर रहे हैं, इसलिए सेना ने भी अपनी तैनाती रणनीति बदल दी है। स्थानीय लोगों ने इस कदम का स्वागत किया है क्योंकि इससे न केवल सुरक्षा बढ़ेगी बल्कि चरवाहों और ग्रामीणों को भी सुरक्षित रास्ते मिलेंगे। हालांकि सर्दियों में इन ऊंचे इलाकों में रसद और संचालन की चुनौतियां बनी रहती हैं।

पिछले साल सुरक्षा बलों ने जम्मू-कश्मीर में 160 से अधिक आतंकियों को मार गिराया, जो आतंकवाद के खिलाफ चल रहे अभियान की मजबूती को दर्शाता है। आने वाले महीनों में सुरक्षा एजेंसियां और बड़े ऑपरेशन चलाने की तैयारी में हैं, ताकि क्षेत्र में स्थायी शांति सुनिश्चित की जा सके। इस नई रणनीति से उम्मीद है कि घाटी और पहाड़ी इलाकों में सुरक्षा की स्थिति और मजबूत होगी।