मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के बीच ईरान के अंदर सत्ता संघर्ष की खबरें तेज हो गई हैं। देश की राजनीतिक स्थिति जटिल होती जा रही है, जहां राष्ट्रपति Masoud Pezeshkian की भूमिका सीमित होती नजर आ रही है, जबकि Islamic Revolutionary Guard Corps (IRGC) का प्रभाव लगातार बढ़ रहा है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, सरकार के कई अहम फैसलों में अब IRGC का हस्तक्षेप बढ़ गया है, जिससे राष्ट्रपति के अधिकार कमजोर पड़ते दिख रहे हैं। हाल ही में खुफिया मंत्री की नियुक्ति को लेकर राष्ट्रपति द्वारा सुझाए गए सभी नामों को खारिज कर दिया गया, जिससे राजनीतिक टकराव खुलकर सामने आ गया। बताया जा रहा है कि IRGC के वरिष्ठ कमांडर Ahmad Vahidi ने स्पष्ट किया है कि मौजूदा युद्ध जैसे हालात में संवेदनशील पदों पर नियुक्ति का अधिकार केवल सेना के पास होना चाहिए। इसी कारण राष्ट्रपति के प्रस्तावों को मंजूरी नहीं मिली।
ईरान की व्यवस्था में आमतौर पर राष्ट्रपति मंत्री के नाम सुझाते हैं और अंतिम निर्णय सुप्रीम लीडर के पास होता है, लेकिन मौजूदा हालात में यह प्रक्रिया भी प्रभावित बताई जा रही है। इस स्थिति का असर अंतरराष्ट्रीय राजनीति पर भी पड़ रहा है। Donald Trump के लिए यह एक चुनौती बनता जा रहा है, क्योंकि ईरान में बातचीत और युद्ध से जुड़े फैसले अब सैन्य नेतृत्व के हाथ में ज्यादा केंद्रित होते दिख रहे हैं। इससे किसी भी समझौते की राह और कठिन हो सकती है।









