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PM राहत योजना: सड़क हादसे में 1.5 लाख तक मुफ्त इलाज, 7 दिन कैशलेस सुविधा

केंद्र सरकार ने सड़क दुर्घटनाओं में घायल लोगों की जान बचाने के उद्देश्य से PM राहत (सड़क दुर्घटना पीड़ित अस्पताल में भर्ती और सुनिश्चित उपचार) योजना शुरू की है। इस योजना के तहत हर पात्र सड़क दुर्घटना पीड़ित को दुर्घटना की तारीख से सात दिनों तक अधिकतम 1.5 लाख रुपये तक का कैशलेस इलाज उपलब्ध कराया जाएगा। इसका मकसद यह सुनिश्चित करना है कि आर्थिक तंगी के कारण किसी भी घायल को समय पर इलाज से वंचित न रहना पड़े।

सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के अनुसार, भारत में हर साल बड़ी संख्या में लोग सड़क हादसों में जान गंवाते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि ‘गोल्डन आवर’ यानी दुर्घटना के बाद का पहला घंटा यदि सही इलाज मिल जाए तो करीब 50 प्रतिशत मौतों को रोका जा सकता है। इसी को ध्यान में रखते हुए योजना को आपातकालीन प्रतिक्रिया प्रणाली (ERSS) की 112 हेल्पलाइन से जोड़ा गया है। पीड़ित, राहगीर या कोई भी व्यक्ति 112 डायल कर निकटतम चिन्हित अस्पताल और एंबुलेंस सहायता प्राप्त कर सकता है।

योजना के तहत प्रति पीड़ित 1.5 लाख रुपये तक का नकदरहित उपचार दिया जाएगा। दुर्घटना की तारीख से सात दिनों तक कवरेज उपलब्ध रहेगा। स्थिरीकरण (स्टेबलाइजेशन) उपचार गैर-जानलेवा स्थिति में 24 घंटे तक और जानलेवा स्थिति में 48 घंटे तक कवर किया जाएगा। इलाज पुलिस प्रमाणीकरण के अधीन एकीकृत डिजिटल प्रणाली पर दर्ज किया जाएगा, ताकि पारदर्शिता बनी रहे और दुरुपयोग रोका जा सके। कैशलेस क्लेम प्रक्रिया को पूरी तरह डिजिटल बनाया गया है। इसमें सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय का इलेक्ट्रॉनिक डिटेल एक्सीडेंट रिपोर्ट (eDAR) प्लेटफॉर्म और नेशनल हेल्थ अथॉरिटी का ट्रांजेक्शन मैनेजमेंट सिस्टम (TMS 2.0) एकीकृत किए गए हैं। इससे दुर्घटना की रिपोर्टिंग, अस्पताल में भर्ती, पुलिस सत्यापन, इलाज प्रबंधन, क्लेम प्रोसेसिंग और अंतिम भुगतान तक की प्रक्रिया सुचारु रूप से पूरी हो सकेगी।

पुलिस सत्यापन गैर-जानलेवा मामलों में 24 घंटे और जानलेवा मामलों में 48 घंटे के भीतर जरूरी होगा। अस्पतालों को भुगतान मोटर वाहन दुर्घटना कोष (MVAF) से किया जाएगा। बीमित मामलों में भुगतान सामान्य बीमा कंपनियों के योगदान से होगा, जबकि गैर-बीमित और हिट एंड रन मामलों में खर्च केंद्र सरकार के बजट आवंटन से वहन किया जाएगा। राज्य स्वास्थ्य एजेंसी द्वारा स्वीकृत क्लेम का भुगतान 10 दिनों के भीतर सुनिश्चित किया जाएगा, ताकि अस्पतालों को वित्तीय स्थिरता बनी रहे और पीड़ितों का उपचार बिना रुकावट जारी रह सके।