भारतीय जनता पार्टी के स्थापना दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए पार्टी की विचारधारा, उपलब्धियों और भविष्य की दिशा पर विस्तार से चर्चा की। अपने संबोधन में उन्होंने स्पष्ट किया कि भाजपा की राजनीति का मूल आधार ‘सेवा’ है, न कि केवल सत्ता प्राप्त करना।
प्रधानमंत्री ने कहा कि देश की राजनीति में दो अलग-अलग दृष्टिकोण दिखाई देते हैं—एक जो केवल सत्ता केंद्रित है और दूसरा जो राष्ट्रहित को सर्वोपरि मानता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि भाजपा ने ‘नेशन फर्स्ट’ की भावना को अपनाकर राजनीति को नई दिशा दी है। उनके अनुसार, पार्टी हर नागरिक को समान सम्मान देती है और समावेशी विकास के लिए प्रतिबद्ध है।
उन्होंने समान नागरिक संहिता (UCC) और ‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ जैसे मुद्दों को केवल नीतिगत प्रस्ताव नहीं, बल्कि सुशासन और राष्ट्रीय एकता की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया। प्रधानमंत्री ने पिछले वर्षों में लिए गए बड़े फैसलों का उल्लेख करते हुए कहा कि धारा 370 हटाने, राम मंदिर निर्माण, ट्रिपल तलाक पर रोक और नागरिकता संशोधन कानून जैसे निर्णय देश के व्यापक हित में लिए गए हैं।
कांग्रेस पर निशाना साधते हुए उन्होंने 1984 के दौर का जिक्र किया और कहा कि उस समय भारी बहुमत मिलने के बावजूद जनता की अपेक्षाओं को पूरा नहीं किया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्षों तक परिवारवाद को प्राथमिकता दी गई, जबकि भाजपा ने हमेशा देश और जनता को सर्वोपरि रखा। अपने संबोधन के अंत में प्रधानमंत्री ने कार्यकर्ताओं से आग्रह किया कि वे सेवा, समर्पण और राष्ट्र निर्माण की भावना के साथ आगे बढ़ते रहें।









