दक्षिण अफ्रीका की तीन दिवसीय यात्रा पूरी कर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी भारत लौट आए और जी20 से लेकर आईबीएसए तक कई अहम मुद्दों पर अपने विचार साझा करते हुए वैश्विक समुदाय को नए संकेत दिए। उन्होंने कहा कि जोहानिसबर्ग में आयोजित सम्मेलन दुनिया के लिए टिकाऊ और स्थिर भविष्य का मार्ग तैयार करेगा। सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए उन्होंने दक्षिण अफ्रीका की जनता और राष्ट्रपति सिरिल रामाफोसा के प्रति आभार जताया और कहा कि विभिन्न नेताओं के साथ उनकी चर्चाएं भारत के द्विपक्षीय साझेदारी को नई दिशा देंगी।
जोहानिसबर्ग में प्रधानमंत्री मोदी ने ब्रिटेन, फ्रांस, ब्राज़ील, कनाडा, जापान, इटली और दक्षिण अफ्रीका के शीर्ष नेतृत्व से मुलाकात की। वैश्विक चुनौतियों पर सहयोग, व्यापार, तकनीक और भू-राजनीतिक संतुलन जैसे मुद्दों पर इन मुलाक़ातों में व्यापक बातचीत हुई। सम्मेलन के दौरान पीएम मोदी ने छह महत्वपूर्ण प्रस्ताव दुनिया के सामने रखे, जिनमें ड्रग तस्करी पर संयुक्त कार्रवाई, G20 हेल्थकेयर रिस्पॉन्स टीम का गठन, अफ्रीका के कौशल विकास के लिए एक व्यापक कार्यक्रम, पारंपरिक ज्ञान का अंतरराष्ट्रीय भंडार, ओपन सैटेलाइट डेटा साझेदारी और खनिज क्षेत्र में सतत एवं सर्कुलर इकोनॉमी को बढ़ावा देने की पहल शामिल थी।
प्रधानमंत्री मोदी ने कृत्रिम मेधा (एआई) के बढ़ते प्रभाव और संभावित दुरुपयोग पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए वैश्विक स्तर पर एक व्यापक समझौते की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि एआई को डीपफेक, अपराध, आतंकवाद और जन-विश्वास को प्रभावित करने वाली गतिविधियों से दूर रखने के लिए इसे मानव-केंद्रित, पारदर्शी और जवाबदेह ढांचे में विकसित किया जाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि भविष्य की तकनीकी क्षमताओं के लिए एक मजबूत वैश्विक टैलेंट मोबिलिटी फ्रेमवर्क आवश्यक है।
आईबीएसए नेताओं की बैठक को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार को समय की मांग बताया। उनके अनुसार, मौजूदा वैश्विक ढांचा बदलते भू-राजनीतिक परिदृश्य और उभरती शक्तियों के अनुरूप नहीं है, ऐसे में UNSC में सुधार अब कोई विकल्प नहीं बल्कि अनिवार्य आवश्यकता है। प्रधानमंत्री ने कहा कि बेहतर वैश्विक शासन के लिए आईबीएसए को दुनिया तक एक स्पष्ट और मजबूत संदेश भेजना चाहिए।









