पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के बीच, भारत में ईरान के दूतावास ने भारतीयों की मानवता और उदारता के लिए धन्यवाद दिया। ईरान ने विशेष रूप से उन लोगों की सराहना की, जिन्होंने युद्ध में प्रभावित ईरानियों की मदद के लिए धन, आभूषण और अन्य सामग्री दान की। कश्मीर के बडगाम जिले में स्थानीय लोगों ने सोना, चांदी और नकद दान कर अपने समर्थन का प्रदर्शन किया। छोटी बच्चियों से लेकर वयस्कों तक ने अपने संग्रह और बचत से योगदान दिया।
दूतावास ने एक महिला की भी सराहना की, जिसने अपने पति की याद में रखा सोना दान किया, जो 28 साल पहले गुजर चुके थे। ईरान ने कहा कि यह त्याग और सच्ची भावनाएं उनके लिए सबसे बड़ा सहारा हैं और इन्हें कभी नहीं भुलाया जाएगा। मोहसिन अली ने बताया कि मस्जिद इमाम ज़मान में दान इकट्ठा करने के लिए स्टॉल लगाया गया और महिलाएं आभूषण, तांबे के बर्तन और नकद योगदान दे रही थीं। उन्होंने कहा कि भले ही वे ईरान जाकर मदद नहीं कर सकते, लेकिन आर्थिक सहायता के माध्यम से मानवता की सेवा कर सकते हैं।
इसके अलावा, मुंबई में ईरान के महावाणिज्य दूत सईद रजा मोसायब मोतलघ ने बताया कि होर्मुज जलमार्ग से भारतीय जहाजों को सुरक्षित मार्ग देने का ईरान का फैसला भारत के साथ लंबे समय से चले आ रहे दोस्ताना रिश्ते को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि ईरान हमेशा भारत का मित्र और सहयोगी रहा है और संघर्ष के दौरान भी दोनों देशों के बीच सहयोग जारी रहेगा। इस पहल ने न केवल स्थानीय समुदायों की एकजुटता दिखाई बल्कि वैश्विक स्तर पर मानवीय सहायता और दोस्ती की भावना को भी उजागर किया।









