पाकिस्तान की गुप्त परमाणु गतिविधियों पर अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सवाल उठने लगे हैं. अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में दावा किया कि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ चुपके से न्यूक्लियर टेस्ट करवा रहे हैं. इसके बाद सिंधी नागरिक समूहों और सिंधूदेश आंदोलन के गठबंधन ने उस गुप्त जगह का खुलासा किया है, जहां इन गतिविधियों को अंजाम दिया जा रहा था. दावा किया गया है कि सिंध प्रांत के दुर्गम पहाड़ी इलाकों में भूमिगत सुरंगें और चैंबर बनाए गए हैं, जिनका इस्तेमाल परमाणु हथियारों के भंडारण और परीक्षण से जुड़ी प्रक्रियाओं के लिए किया जा रहा है.
इन संगठनों ने संयुक्त राष्ट्र महासचिव, अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) और मानवाधिकार आयोग (OHCHR) को एक पत्र भेजकर तत्काल जांच की मांग की है. पत्र के अनुसार, जामशोरो के उत्तर में नूरीआबाद, कंभर-शहदादकोट और मंचर झील के पश्चिमी इलाकों में सैन्य बलों की भारी तैनाती की गई है. ‘जिये सिंध मुत्तहिदा महाज’ के प्रमुख शफी बुरफत ने इस पत्र की कॉपी अपने आधिकारिक ‘X’ अकाउंट पर साझा करते हुए कहा कि यह सिर्फ राजनीतिक मुद्दा नहीं, बल्कि नागरिकों और पर्यावरण की सुरक्षा का सवाल है.
समूहों ने चेतावनी दी है कि यदि इन सुरंगों में सचमुच परमाणु सामग्री मौजूद है, तो इससे रेडियोएक्टिव प्रदूषण, पर्यावरणीय क्षति और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा मानकों का उल्लंघन हो सकता है. उन्होंने संयुक्त राष्ट्र से स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच अभियान शुरू करने, IAEA विशेषज्ञों को ऑन-साइट निरीक्षण के लिए भेजने तथा पर्यावरण और मानवाधिकारों पर इसके प्रभाव का मूल्यांकन करने की अपील की है.









