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शीतकालीन सत्र से पहले सर्वदलीय बैठक में विपक्ष ने उठाए बड़े मुद्दे, सरकार ने मांगा सहयोग

शीतकालीन सत्र शुरू होने से एक दिन पहले केंद्र सरकार ने रविवार को सर्वदलीय बैठक बुलाई, जिसमें सभी प्रमुख राजनीतिक दलों ने हिस्सा लिया। बैठक संक्षिप्त रही लेकिन इसमें सत्र को लेकर महत्वपूर्ण चर्चाएँ हुईं। विपक्ष ने वोटर लिस्ट के विशेष पुनरीक्षण, दिल्ली ब्लास्ट और विदेश नीति से जुड़े मुद्दों पर सदन में बहस की मांग रखी। दूसरी ओर, सरकार ने आगामी विधायी एजेंडे की रूपरेखा साझा की और सत्र को सुचारू रखने के लिए सभी दलों से सहयोग की अपील की।

कांग्रेस ने सत्र की छोटी अवधि—सिर्फ 15 बैठकें—पर नाराजगी जताते हुए कहा कि सरकार संसद की कार्यवाही को सीमित करना चाहती है। यह सत्र 19 दिसंबर तक चलेगा और हाल के वर्षों में सबसे छोटे सत्रों में शामिल होगा। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने सभी दलों से शांतिपूर्ण विमर्श की अपील की और कहा कि “ठंड के मौसम में गरमागरम बहस से बचना देशहित में होगा।”

इस सत्र में सरकार 14 अहम बिल पेश करने की तैयारी में है, जिनमें परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में निजी भागीदारी बढ़ाने वाला Atomic Energy Bill 2025, उच्च शिक्षा व्यवस्था में बड़ा सुधार लाने वाला Higher Education Commission Bill, IBC Amendment Bill और राष्ट्रीय राजमार्ग अधिग्रहण से जुड़ा संशोधन विधेयक मुख्य हैं। कुल मिलाकर, सत्र में राजनीतिक टकराव और महत्वपूर्ण सुधार दोनों साथ दिखाई दे सकते हैं।