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विपक्ष ने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ पेश किया अविश्वास प्रस्ताव, 118 सांसदों ने समर्थन दिया

विपक्षी दलों ने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पेश किया है। मंगलवार को कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई के नेतृत्व में यह प्रस्ताव लोकसभा सचिवालय को सौंपा गया। सूत्रों के अनुसार, इस प्रस्ताव के समर्थन में कुल 118 सांसद खड़े हुए हैं। हालांकि, तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) इस प्रस्ताव के समर्थन में शामिल नहीं है। प्रस्ताव सौंपने की प्रक्रिया में कांग्रेस उपनेता गौरव गोगोई, मुख्य सचेतक कोडिकुनिल सुरेश और सांसद मोहम्मद जावेद शामिल थे।

विपक्ष ने इस कदम को स्पीकर की कार्यशैली और संसद संचालन के तरीकों से असंतोष जताने के रूप में लिया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इतने बड़े समर्थन के साथ यह प्रस्ताव संसदीय इतिहास में एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हो सकता है। अब यह संसद अध्यक्ष या स्पीकर पर निर्भर करेगा कि वे प्रस्ताव को स्वीकार करें और चर्चा एवं मतदान की प्रक्रिया तय करें।

लोकसभा में स्पीकर को हटाने की प्रक्रिया संविधान के अनुच्छेद 94(सी) के तहत होती है। इसके लिए प्रस्ताव में स्पष्ट आरोपों का उल्लेख आवश्यक होता है, जिसे कम से कम 50 सांसदों का समर्थन मिलना चाहिए। प्रस्ताव को नियम अनुसार नोटिस के रूप में दर्ज किया जाता है और लोकसभा सचिवालय 14 दिन के भीतर चर्चा की तारीख तय करता है। बहुमत से पारित होने पर ही स्पीकर पद से हटाए जा सकते हैं।

इतिहास में अब तक केवल तीन बार स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पेश किया गया है: 1954 में जी. वी. मावलंकर, 1966 में हुकम सिंह और 1987 में बलराम झाकड़। सभी प्रस्तावों को बहस के बाद खारिज कर दिया गया। पिछले कुछ हफ्तों में लोकसभा में गतिरोध की स्थिति रही है। विपक्ष ने आरोप लगाया कि उन्हें बोलने की अनुमति नहीं दी जा रही, जबकि सत्तापक्ष के सांसद स्वतंत्र रूप से चर्चा कर रहे हैं। यही कारण है कि विपक्ष ने अब स्पीकर के खिलाफ यह कड़ा कदम उठाया है।