केंद्र सरकार द्वारा हाल ही में लागू किए गए चार नए श्रम कानूनों को लेकर विपक्षी दलों में नाराजगी दिखाई दे रही है। शिवसेना (UBT) और कांग्रेस ने इसे मजदूर विरोधी बताते हुए कानूनों को वापस लेने की मांग की है।शिवसेना (UBT) के सांसद अरविंद सावंत ने कहा कि नए लेबर कोड मजदूरों के अधिकारों को कमजोर करेंगे और कामगारों के लिए अनिश्चितता की स्थिति पैदा करेंगे। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार पूंजीपतियों और अमीर वर्ग के पक्ष में काम कर रही है। सावंत ने कहा कि यह कानून मजदूरों की जिंदगी पर नकारात्मक प्रभाव डालेंगे और उनका विरोध जारी रहेगा। उन्होंने यह भी बताया कि नए कोड को न्यायालय में चुनौती दी जाएगी।
नए कोड में इंडस्ट्रियल रिलेशन कोड 2020, ऑक्यूपेशनल सेफ्टी, हेल्थ कोड 2020, सोशल सिक्योरिटी कोड 2020 और कोड ऑन वेजेज 2019 शामिल हैं, जिन्हें पिछले साल से लंबित रखा गया था। इन कानूनों के लागू होने से पहले, 100 कर्मचारियों तक वाली यूनिट में बदलाव के लिए राज्य सरकार की अनुमति आवश्यक होती थी, जबकि नए कानून के अनुसार यह सीमा बढ़कर 300 कर्मचारियों तक हो गई है।कांग्रेस ने भी केंद्र सरकार पर मजदूर विरोधी कानूनों को लागू करने का आरोप लगाया है। पार्टी के असंगठित कामगार एवं कर्मचारी प्रकोष्ठ के अध्यक्ष उदित राज ने कहा कि सरकार ने पुराने मजदूर हितैषी कानूनों को एक झटके में खत्म कर दिया।
केंद्र सरकार के अनुसार, नए कोड के तहत मजदूरों के लिए समय पर न्यूनतम वेतन और यूनिवर्सल सोशल सिक्योरिटी जैसी व्यवस्थाएं लागू की गई हैं। इसके अलावा काम के घंटे बढ़ाने और फिक्स्ड-टर्म रोजगार से जुड़े नियम भी शामिल किए गए हैं। इन चार कोड के माध्यम से पहले से मौजूद 29 अलग-अलग श्रम कानूनों को एकीकृत किया गया है।इस विषय पर विपक्ष का विरोध और कानूनों की आलोचना जारी रहने की संभावना है, जिससे भविष्य में श्रम नीति और कामगार अधिकारों को लेकर राजनीतिक बहस तेज होने की आशंका है।









