हिमाचल प्रदेश सरकार ने मेधावी विद्यार्थियों को लैपटॉप या टैबलेट देने की योजना में बड़ा बदलाव किया है। अब इस योजना का लाभ केवल सरकारी स्कूलों के विद्यार्थियों को ही मिलेगा, जबकि निजी स्कूलों से संबंधित टॉपर्स को योजना से बाहर कर दिया गया है। सरकार ने पिछले तीन शैक्षणिक सत्रों—2022-23, 2023-24 और 2024-25—के मेधावियों के लिए लगभग नौ करोड़ रुपये का बजट निर्धारित किया है।
नई व्यवस्था के तहत विद्यार्थियों को सीधे उपकरण नहीं दिए जाएंगे, बल्कि इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स खरीदने के लिए 16,000 रुपये तक के कूपन या वाउचर दिए जाएंगे। छात्र इन कूपनों से अपनी पसंद की कंपनी का लैपटॉप या टैबलेट खरीद सकेंगे। यदि कोई छात्र उच्च क्षमता या महंगे गैजेट लेना चाहता है, तो अतिरिक्त राशि स्वयं वहन करेगा। प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए एक ऑनलाइन पोर्टल तैयार किया जा रहा है, जिसके माध्यम से चयनित कंपनियां उपकरण छात्रों के घर तक पहुंचाएंगी।
शिक्षा सचिव राकेश कुमार के अनुसार, स्कूल शिक्षा निदेशालय को सरकारी स्कूलों के टॉपर्स की नई सूची तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं। योजना में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति वर्ग के मेधावी छात्रों को प्राथमिकता दी जाएगी। दिसंबर में कूपन वितरण कार्यक्रम प्रस्तावित है।
हालांकि, इस निर्णय का निजी स्कूल प्रबंधन संगठनों ने कड़ा विरोध किया है। हमीरपुर में आयोजित प्रेस वार्ता में हिमाचल प्रदेश स्कूल मैनेजमेंट वेलफेयर एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष जगजीत सिंह ठाकुर ने कहा कि यह फैसला भेदभावपूर्ण है, क्योंकि मेधावी बच्चे किसी स्कूल के नहीं, बल्कि बोर्ड परीक्षा के टॉपर होते हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू और शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर से इस निर्णय पर पुनर्विचार की मांग की है।
ठाकुर ने कहा कि तीन वर्षों से मेधावी बच्चे इस इनाम की प्रतीक्षा कर रहे थे, लेकिन अब निजी स्कूलों के विद्यार्थी निराश हैं। संगठन का कहना है कि वे जल्द ही मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री से मुलाकात कर सभी मेधावी छात्रों के हित में समाधान की मांग करेंगे।









