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ओमान की हरी झंडी से भारतीय हलाल सर्टिफिकेट को अंतरराष्ट्रीय पहचान, निर्यात और व्यापार को नई रफ्तार

भारत के लिए एक अहम कूटनीतिक और व्यापारिक उपलब्धि के तौर पर ओमान ने भारत सरकार द्वारा जारी किए गए हलाल सर्टिफिकेट को औपचारिक मान्यता दे दी है। इस फैसले से खासतौर पर मीट और उससे जुड़े उत्पादों के निर्यात को बड़ा प्रोत्साहन मिलने की उम्मीद है। अब तक भारतीय निर्यातकों को अलग–अलग निजी एजेंसियों से हलाल प्रमाणपत्र लेना पड़ता था, जिससे प्रक्रिया जटिल और समय लेने वाली हो जाती थी। ओमान की इस स्वीकृति के बाद पहली बार भारत का सरकारी हलाल सर्टिफिकेशन सीधे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्वीकार किया गया है।

भारत सरकार अब हलाल सर्टिफिकेशन को एक केंद्रीकृत ढांचे के तहत लाने की तैयारी कर रही है। इसके लिए APEDA और क्वालिटी कंट्रोल ऑफ इंडिया जैसी संस्थाओं को शामिल करते हुए एक औपचारिक व्यवस्था पहले ही अधिसूचित की जा चुकी है। यह व्यवस्था खास तौर पर निर्यात के लिए बनाई गई है, जिससे करीब 50 ऐसे देशों में भारतीय उत्पादों की पहुंच आसान होगी, जहां हलाल सर्टिफिकेट अनिवार्य माना जाता है।

हलाल सर्टिफिकेट का आशय यह होता है कि किसी उत्पाद के निर्माण में इस्लामी नियमों के खिलाफ किसी सामग्री या प्रक्रिया का इस्तेमाल नहीं किया गया है। मीट उत्पादों के मामले में यह प्रमाणन तभी दिया जाता है, जब जानवर को इस्लामी परंपरा के अनुसार ज़बह किया गया हो। इसके अलावा यह सर्टिफिकेट खाद्य पदार्थों के साथ-साथ कॉस्मेटिक्स, दवाइयों और पर्सनल केयर उत्पादों पर भी लागू होता है।

इस फैसले का एक और अहम पहलू यह है कि ओमान ने भारत के लिए अपने मार्बल ब्लॉक के निर्यात पर लगी रोक भी हटा दी है। इससे अब भारत ओमान से मार्बल आयात कर सकेगा, जिससे दोनों देशों के बीच व्यापारिक रिश्ते और मजबूत होंगे। कुल मिलाकर यह कदम भारत के निर्यातकों के लिए नए अवसर खोलने वाला साबित हो सकता है।