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अब सेना के अफसर और रिटायर्ड अधिकारी किताबें लिखने से पहले लेंगे रक्षा मंत्रालय की मंजूरी, नए नियम तैयार

सेना के वर्तमान और सेवानिवृत्त अधिकारियों के लिए किताबें लिखने का नियम अब और सख्त होने जा रहा है। रक्षा मंत्रालय राष्ट्रीय सुरक्षा और संवेदनशील जानकारी की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए नए दिशानिर्देश तैयार कर रहा है। इसका उद्देश्य मौजूदा कानूनों की अस्पष्टता को दूर करना और किताबों के प्रकाशन में पारदर्शिता लाना है। यह कदम पूर्व सेना प्रमुख जनरल एम.एम. नरवणे की अप्रकाशित किताब Four Stars of Destiny को लेकर उठे विवाद के बाद आया है। विवाद में किताब के संवेदनशील और गोपनीय सैन्य विवरण को लेकर चिंता जताई गई थी।

नए नियमों की मुख्य बातें:

  1. मंजूरी अनिवार्य: अब संवेदनशील सामग्री वाली किसी भी किताब के प्रकाशन से पहले मंत्रालय की अनुमति लेना अनिवार्य होगा।
  2. किसे लागू होंगे: ये नियम सेवारत और सेवानिवृत्त दोनों प्रकार के अधिकारियों पर लागू होंगे।
  3. OSA और सेवा नियमों का पालन: नई गाइडलाइंस में आधिकारिक गोपनीयता अधिनियम (Official Secrets Act) और सेवा नियमों को शामिल किया जाएगा।
  4. संवेदनशील सामग्री पर रोक: ऑपरेशन, रणनीति, उपकरण क्षमता, खुफिया जानकारी, राष्ट्रीय सुरक्षा या विदेशी संबंधों से जुड़ी जानकारी वाली किताबों को बिना मंजूरी प्रकाशित नहीं किया जा सकेगा।
  5. फिक्शन में भी सावधानी: काल्पनिक कथाओं में भी वास्तविक संवेदनशील जानकारी का उपयोग प्रतिबंधित रहेगा।
  6. रिटायर्ड अधिकारियों के लिए स्पष्ट प्रक्रिया: पहले रिटायर्ड अधिकारियों के लिए कोई स्पष्ट नियम नहीं था, अब उन्हें भी किताब प्रकाशन से पहले मैनुस्क्रिप्ट मंत्रालय को जमा करना और अनुमति लेना अनिवार्य होगा।

पहले और अब का अंतर:

  • सेवारत अधिकारियों के लिए: पहले से ही आर्मी रूल्स 1954 की धारा 21 के तहत सरकारी अनुमति अनिवार्य थी।
  • सेवानिवृत्त अधिकारियों के लिए: अब तक कोई स्पष्ट नियम नहीं था, केवल Official Secrets Act के तहत संवेदनशील जानकारी का खुलासा अपराध था। नए नियमों से प्रक्रिया स्पष्ट और कड़ी होगी।

क्या बदलेगा:

  • अनुमति प्रक्रिया विस्तृत और स्पष्ट होगी।
  • राष्ट्रीय सुरक्षा पर फोकस बढ़ेगा।
  • असंगतियों को दूर कर समान प्रक्रिया लागू होगी।
  • संवेदनशील किताबों में पहले की तुलना में सख्ती बढ़ेगी।

रक्षा मंत्रालय का कहना है कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का सम्मान है, लेकिन राष्ट्रीय सुरक्षा सर्वोपरि है। नए दिशानिर्देश विवादों और अस्पष्टताओं को रोकने और सेना की गोपनीय जानकारियों की रक्षा के लिए तैयार किए जा रहे हैं। यह नया नियम जल्द ही अंतिम रूप में लागू होगा और सभी सैन्य कर्मियों को इसकी जानकारी दी जाएगी।