वेनेजुएला की विपक्षी नेता मारिया कोरीना मचाडो द्वारा अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को अपना नोबेल शांति पुरस्कार सौंपने की खबर के बाद यह सवाल चर्चा में है कि क्या कोई नोबेल विजेता अपना पुरस्कार किसी दूसरे व्यक्ति को ट्रांसफर कर सकता है। मचाडो ने हाल ही में व्हाइट हाउस में ट्रंप से मुलाकात के दौरान यह पदक दिया और इसे ऐतिहासिक कदम बताया।
हालांकि नोबेल फाउंडेशन के नियम इस बारे में बिल्कुल स्पष्ट हैं। किसी भी नोबेल पुरस्कार की आधिकारिक घोषणा के बाद उसे न तो किसी और के नाम किया जा सकता है, न साझा किया जा सकता है और न ही ट्रांसफर किया जा सकता है। यानी “नोबेल लॉरिएट” का दर्जा पूरी तरह नॉन-ट्रांसफरेबल होता है और वह केवल उसी व्यक्ति के पास रहता है जिसे यह सम्मान दिया गया हो। हां, विजेता को यह अधिकार जरूर होता है कि वह अपनी पुरस्कार राशि या मेडल को अपनी इच्छा से किसी को दे, दान करे या बेच दे। लेकिन इससे सामने वाला व्यक्ति नोबेल पुरस्कार विजेता नहीं बन जाता।
इससे पहले कई नोबेल विजेताओं ने अपनी पुरस्कार राशि सामाजिक कार्यों के लिए दान की है। पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा और पत्रकार दिमित्री मुराटोव इसके उदाहरण हैं। मुराटोव ने तो अपने नोबेल पीस प्राइज के मेडल को नीलाम कर उसकी रकम यूक्रेनी शरणार्थियों की मदद में लगा दी थी। सरल शब्दों में, नोबेल का मेडल और पैसा दिया या बेचा जा सकता है, लेकिन नोबेल विजेता का खिताब नहीं।









