पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में खडूर साहिब से सांसद अमृतपाल सिंह से जुड़े मामले में गुरुवार को अहम घटनाक्रम देखने को मिला। संसद के बजट सत्र में हिस्सा लेने के लिए पैरोल की मांग पर सुनवाई के दौरान पीठ के एक जज ने खुद को इस केस से अलग कर लिया। इसके बाद अदालत ने स्पष्ट किया कि अब इस याचिका पर विशेष रूप से गठित पीठ फैसला करेगी।
अमृतपाल सिंह ने अदालत का रुख करते हुए अनुरोध किया है कि उन्हें बजट सत्र में भाग लेने की अनुमति दी जाए। यह याचिका चीफ जस्टिस शील नागू और जस्टिस संजीव बेरी की पीठ के समक्ष सूचीबद्ध थी। प्रारंभिक सुनवाई के दौरान अदालत इस बात पर विचार कर रही थी कि संबंधित प्राधिकारी को अमृतपाल की ओर से दी गई अर्जी पर सीमित समय में निर्णय लेने का निर्देश देकर मामले का निपटारा किया जा सकता है। इसी बीच पीठ के एक सदस्य के अलग होने के फैसले के बाद सुनवाई को विशेष पीठ के पास भेज दिया गया।
अमृतपाल की ओर से पेश वकील ने दलील दी कि संसद का सत्र नजदीक है, इसलिए सरकार को अधिकतम चार दिनों के भीतर उनकी मांग पर निर्णय लेने का आदेश दिया जाए। वहीं, पंजाब सरकार ने इस पर आपत्ति जताते हुए कहा कि अमृतपाल सिंह राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के तहत असम की डिब्रूगढ़ जेल में बंद हैं, ऐसे में तुरंत निर्णय लेना व्यवहारिक नहीं है।
राज्य सरकार के अनुसार, गणतंत्र दिवस से जुड़ी प्रशासनिक व्यस्तताओं के कारण 28 जनवरी से पहले प्रक्रिया पूरी कर पाना मुश्किल है। सरकार ने यह भी बताया कि बजट सत्र दो चरणों में आयोजित होगा, इसलिए यह तर्क सही नहीं है कि अमृतपाल को केवल फरवरी तक के लिए ही अनुमति चाहिए।
केंद्र सरकार की ओर से अदालत को अवगत कराया गया कि इस मामले में न तो लोकसभा अध्यक्ष और न ही राज्यपाल की कोई सीधी भूमिका बनती है। सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस ने अमृतपाल के वकील से कहा कि जब तक इस पर निर्णय नहीं होता, तब तक वे अपने मुवक्किल को अध्ययन और शोध में समय लगाने की सलाह दें। अब यह मामला आज शुक्रवार को विशेष पीठ के समक्ष रखा जाएगा, जहां अमृतपाल सिंह की पैरोल याचिका पर आगे की कार्यवाही होगी।









