Delhi

दिल्ली में प्रदूषण जांच का नया मॉडल: PUC 2.0 से खत्म होगी फर्जीवाड़े की गुंजाइश

दिल्ली सरकार राजधानी में प्रदूषण जांच (PUC) व्यवस्था को पूरी तरह नए सिरे से तैयार करने जा रही है। मौजूदा सड़क किनारे बने छोटे PUC बूथों की जगह अब बड़े और सेंट्रलाइज्ड PUC सेंटर स्थापित किए जाने की योजना है, जिसे सरकार ‘PUC 2.0’ मॉडल का नाम दे रही है। इस नई प्रणाली का मुख्य उद्देश्य मानव हस्तक्षेप को कम करना और पूरी प्रक्रिया को तकनीक आधारित बनाना है।

PUC 2.0 के तहत प्रदूषण जांच पूरी तरह ऑटोमेटेड होगी। इसमें सेंसर और रोबोटिक्स तकनीक की मदद से वाहनों से निकलने वाले धुएं की रियल टाइम जांच की जाएगी। जांच के दौरान प्राप्त पूरा डेटा सीधे सेंट्रल सर्वर पर अपलोड होगा, जिससे फर्जी सर्टिफिकेट जारी करने और मनमानी की संभावनाएं लगभग खत्म हो जाएंगी। फिलहाल यह तकनीक कमर्शियल वाहनों तक सीमित है, लेकिन सरकार इसे निजी वाहनों पर भी लागू करने की तैयारी में है।

इस बदलाव की बड़ी वजह CAG की वह रिपोर्ट है, जिसमें मौजूदा PUC सिस्टम की गंभीर खामियां सामने आई थीं। रिपोर्ट में कई मामलों में बिना सही जांच के सर्टिफिकेट जारी होने और फेल गाड़ियों को पास करने का खुलासा हुआ था। इन्हीं कमियों को दूर करने के लिए सरकार अब टेक्नोलॉजी आधारित पारदर्शी व्यवस्था पर जोर दे रही है।

PUC 2.0 को लेकर दिल्ली सचिवालय में मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की अध्यक्षता में अहम बैठक भी हो चुकी है, जिसमें पर्यावरण और परिवहन मंत्रियों ने नए ढांचे पर विस्तार से चर्चा की। सरकार का फोकस साफ है—प्रदूषण जांच में पारदर्शिता और भरोसेमंद सिस्टम।