नई दिल्ली में हाल ही में दिए गए एक भाषण में केंद्रीय मंत्री ने डिजिटल प्लेटफॉर्म और कंटेंट निर्माताओं के बीच आर्थिक संतुलन की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया कंपनियां अपने प्लेटफॉर्म पर मौजूद सामग्री से भारी मुनाफा कमाती हैं, इसलिए यह जरूरी है कि उस आय का एक उचित हिस्सा उन लोगों तक पहुंचे जो कंटेंट तैयार करते हैं। चाहे वे स्वतंत्र पत्रकार हों, सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर, शोधकर्ता या शिक्षाविद, सभी के काम को उचित आर्थिक मूल्य मिलना चाहिए।
मंत्री ने कहा कि देश के दूरदराज क्षेत्रों में रहने वाले क्रिएटर्स भी डिजिटल अर्थव्यवस्था का अहम हिस्सा बन रहे हैं। पारंपरिक मीडिया संस्थानों के साथ-साथ ऑनलाइन कंटेंट बनाने वाले पेशेवर भी ज्ञान, जानकारी और मनोरंजन प्रदान करने में योगदान दे रहे हैं। यदि राजस्व वितरण में पारदर्शिता और निष्पक्षता लाई जाती है, तो यह भारत की तेजी से बढ़ती डिजिटल कंटेंट इंडस्ट्री को और मजबूत बना सकता है।
इसके साथ ही सरकार डिजिटल सुरक्षा को लेकर भी सख्त कदम उठा रही है। सूचना प्रौद्योगिकी नियमों में प्रस्तावित संशोधनों के तहत एआई से तैयार गलत सूचनाओं और डीपफेक सामग्री पर रोक लगाने की योजना है। फेसबुक, यूट्यूब और स्नैपचैट जैसे बड़े प्लेटफॉर्म, जिनके भारत में लाखों उपयोगकर्ता हैं, को एआई-जनित सामग्री को स्पष्ट रूप से लेबल करना होगा। साथ ही, एआई से बनी तस्वीरों या वीडियो में स्थायी मेटाडेटा जोड़ा जाएगा, जिसे आसानी से हटाया या बदला नहीं जा सकेगा।
प्रस्तावित नियमों के अनुसार, एआई कंटेंट में दृश्य सामग्री के कम से कम दस प्रतिशत हिस्से पर पहचान चिह्न दिखाना आवश्यक होगा, ताकि उपयोगकर्ता आसानी से वास्तविक और एआई-जनित सामग्री में फर्क कर सकें। सरकार का मानना है कि ये कदम डिजिटल स्पेस को अधिक सुरक्षित और जिम्मेदार बनाने में मदद करेंगे।









