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भारत में 400 से ज्यादा ग्लेशियर झीलें बनीं खतरा, जलवायु परिवर्तन से बढ़ा बाढ़ का जोखिम: रिपोर्ट

भारत में जलवायु परिवर्तन का असर अब और भी गंभीर होता जा रहा है. हाल ही में केंद्रीय जल आयोग (CWC) की एक नई रिपोर्ट सामने आई है, जिसमें बताया गया है कि देश में 400 से ज्यादा ग्लेशियर झीलें लगातार फैलती जा रही हैं. यह स्थिति भविष्य में अचानक आई बाढ़ (फ्लैश फ्लड) जैसी आपदाओं का कारण बन सकती है.

सबसे ज्यादा खतरा हिमालयी राज्यों में

‘ग्लेशियल लेक्स एंड वॉटर बॉडीज फॉर जून 2025’ नाम की इस रिपोर्ट में बताया गया है कि लद्दाख, जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, सिक्किम और अरुणाचल प्रदेश में फैली 432 झीलें लगातार आकार में बढ़ रही हैं. वैज्ञानिकों का कहना है कि इन झीलों की निगरानी करना अब बहुत जरूरी हो गया है क्योंकि ये झीलें अचानक फूट सकती हैं और नीचे बसे इलाकों में भारी तबाही मचा सकती हैं.

ग्लेशियर झीलों की स्थिति

रिपोर्ट के अनुसार:

अरुणाचल प्रदेश में सबसे ज्यादा 197 झीलें हैं

लद्दाख में 120

जम्मू-कश्मीर में 57

सिक्किम में 47

हिमाचल प्रदेश में 6

उत्तराखंड में 5 झीलें शामिल हैं

इसके साथ ही यह भी सामने आया है कि भारत में इन झीलों का कुल क्षेत्रफल पिछले कुछ वर्षों में बहुत तेजी से बढ़ा है. साल 2011 में इनका क्षेत्रफल करीब 1,917 हेक्टेयर था, जो 2025 तक बढ़कर 2,508 हेक्टेयर तक पहुंच गया है.

सुझाव और चेतावनी

जल आयोग ने चेतावनी दी है कि अगर समय रहते सतर्क नहीं हुए, तो हिमालयी क्षेत्रों में बड़ी त्रासदी हो सकती है. इसके लिए आयोग ने निचले इलाकों में रीयल-टाइम मॉनिटरिंग सिस्टम, सैटेलाइट आधारित चेतावनी प्रणाली और आपदा प्रबंधन तंत्र को मजबूत करने की सिफारिश की है. रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि हिमालय क्षेत्र में ग्लेशियरों का पिघलना और झीलों का फैलना जलवायु परिवर्तन के सबसे खतरनाक और साफ नजर आने वाले असर हैं.