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ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग पर लगाया मतदाताओं को परेशान करने का आरोप, पांचवीं बार लिखा पत्र

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग को पांचवीं बार पत्र भेजकर मतदाताओं के साथ अनुचित व्यवहार और नियमों की अनदेखी का आरोप लगाया है। उन्होंने दावा किया कि मतदाताओं द्वारा सभी आवश्यक दस्तावेज जमा करने के बावजूद उनके नाम मतदाता सूची से हटाए जा रहे हैं और जमा किए गए दस्तावेजों की कोई रसीद या प्रमाण नहीं दिया जा रहा।

मुख्यमंत्री ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को भेजे गए अपने नवीनतम पत्र में लिखा कि इस तरह की प्रक्रियाएँ मतदाताओं के अधिकारों का हनन करती हैं और आम जनता को परेशान करने का कारण बन रही हैं। उन्होंने कहा कि आयोग द्वारा अक्सर सुनवाई के लिए बुलाने और दस्तावेजों को ‘मौजूद नहीं’ बताने जैसी कार्रवाई की जा रही है, जबकि दस्तावेज पूरी तरह से प्रस्तुत किए गए हैं।

ममता ने यह भी सवाल उठाया कि क्यों बच्चों को सुनवाई के लिए बुलाया जा रहा है जब माता-पिता और बच्चों की उम्र में केवल 18-19 साल का अंतर है। उन्होंने पत्र में उल्लेख किया कि जिन मतदाताओं के नाम 2002 की मतदाता सूची में दर्ज हैं, उनके लिए किसी सुनवाई की आवश्यकता नहीं होनी चाहिए।

सीएम ने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग पिछले दो दशकों में किए गए अपने ही सुधारों की अनदेखी कर रहा है। उनका कहना है कि आयोग जानबूझकर मतदाताओं को परेशान कर रहा है, जबकि उनके पास सभी आवश्यक प्रमाण मौजूद हैं। ममता के इस पत्र में आम जनता के साथ हो रही परेशानियों को तुरंत रोकने की अपील की गई है और आयोग से निष्पक्ष एवं पारदर्शी प्रक्रिया अपनाने की मांग की गई है।