दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने आदिल हुसैनी और उसके भाई अख्तर हुसैन को गिरफ्तार किया, जिनकी आपराधिक गतिविधियों का जाल अंतरराष्ट्रीय स्तर तक फैला हुआ था. दोनों भाइयों ने पुलिस और जांच एजेंसियों की नजरों से बचने के लिए अपनी पहचान बदल ली थी और नए पासपोर्ट बनवाए. कभी-कभी उन्होंने खुद को सरकारी रिकॉर्ड में मृत तक दिखाया.
जांच में सामने आया कि उनकी अपराध यात्रा ईरान से शुरू हुई थी. दोनों ने तेहरान और इस्लामाबाद के बीच यात्रा करते हुए लीबिया में एक ठगी नेटवर्क स्थापित किया. उन्होंने कथित न्यूक्लियर प्लांट के डिज़ाइन ईरानी एजेंसियों को बेचे, लेकिन जानबूझकर डिज़ाइन में तकनीकी खामियाँ डाल दीं. अख्तर के पास से फर्जी दस्तावेज़, पासपोर्ट, आधार, पैन कार्ड और BARC का नकली आईडी कार्ड बरामद हुआ. वह खुद को वैज्ञानिक और सुरक्षा विशेषज्ञ के रूप में पेश करता रहा. दुबई और ईरान में भी उसने इसी तरह फर्जी पहचान का उपयोग किया.
आदिल और अख्तर दोनों ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर झूठी डिजिटल प्रोफाइल और नकली नेटवर्क के सहारे अपनी पहचान बनाई. आदिल ने खुद को कनाडा की ओंटारियो पावर जनरेशन में “Nuclear Officer” और अख्तर ने अमेरिका के CSIS थिंक टैंक से जुड़े विशेषज्ञ के रूप में पेश किया. पुलिस के मुताबिक, इनकी यह रणनीति उन्हें संवेदनशील तकनीकी डेटा और भरोसा हासिल करने में मदद कर रही थी. स्पेशल सेल की सतर्कता और ट्रैकिंग के चलते आखिरकार दोनों भाइयों का खेल खत्म हुआ.









