केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने अरावली क्षेत्र को लेकर चल रहे विवाद पर सफाई दी है। उन्होंने कहा कि कुछ यूट्यूब चैनल्स और लोगों ने ‘100 मीटर’ के मापदंड को लेकर गलत प्रचार किया है। मंत्री ने स्पष्ट किया कि अरावली में खनन पर कोई छूट नहीं दी गई है। अरावली के कुल 1.44 लाख वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में केवल 0.19 फीसदी यानी लगभग 2 फीसदी क्षेत्र ही खनन के लिए पात्र हो सकता है। शेष पूरी अरावली संरक्षित और सुरक्षित है। उन्होंने बताया कि अरावली दिल्ली, राजस्थान, हरियाणा और गुजरात के 39 जिलों में फैली हुई है।
सुप्रीम कोर्ट द्वारा अनुमोदित परिभाषा के अनुसार 100 मीटर सुरक्षा क्षेत्र पहाड़ी के आधार (बॉटम) से ऊपर तक लागू होता है। यानी पहाड़ी के बीच की भूमि भी संरक्षण के दायरे में शामिल होगी। भूपेंद्र यादव ने कहा कि दिल्ली में खनन गतिविधियों पर पूरी तरह से रोक है और सरकार पिछले दो साल से ग्रीन अरावली पहल चला रही है। इसके लागू होने के बाद अरावली का 90% से अधिक क्षेत्र संरक्षित क्षेत्र में शामिल हो गया है। केंद्रीय मंत्री ने यूट्यूबर्स और कुछ लोगों द्वारा फैलाए जा रहे भ्रम पर दो टूक कहा कि “100 मीटर का मतलब पहाड़ी के ऊपर से नीचे की खुदाई की अनुमति नहीं है”।









