भारत अपनी निगरानी और रक्षा क्षमता को और मजबूत बनाने के लिए तेजी से कदम बढ़ा रहा है। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान बेहतरीन प्रदर्शन कर चुके हेरॉन MK-2 ड्रोन की अतिरिक्त खेप के लिए भारत ने इज़राइल के साथ नया समझौता किया है। इज़राइल एयरोस्पेस इंडस्ट्रीज (IAI) के अधिकारी के अनुसार, यह ड्रोन पहले से थलसेना और वायुसेना के बेड़े का हिस्सा हैं, लेकिन अब भारतीय नौसेना में भी इन्हें शामिल किया जाएगा। मेक इन इंडिया कार्यक्रम के तहत भारत ने हाल ही में 87 MALE ड्रोन के अधिग्रहण का प्रस्ताव भी दिया था।
हेरॉन MK-2 की खासियत इसकी लंबी उड़ान क्षमता और उन्नत निगरानी तकनीक है। यह ड्रोन 35,000 फीट की ऊंचाई तक उड़ सकता है और लगातार 45 घंटे तक मिशन पूरा कर सकता है। 150 नॉटिकल मील की स्पीड वाला यह ड्रोन ऑप्टिकल सेंसर, इंफ्रारेड सिस्टम, रडार और इलेक्ट्रॉनिक इंटेलिजेंस पेलोड एक साथ वहन कर सकता है। इसकी ऑटोमैटिक टेक-ऑफ और लैंडिंग टेक्नोलॉजी इसे युद्धक्षेत्र में अत्यंत उपयोगी बनाती है।
सबसे खास बात—यह ड्रोन खराब मौसम और कठिन इलाकों में भी प्रभावी रहता है। यही वजह है कि भारतीय सेना इसे चीन और पाकिस्तान सीमा पर खास तौर पर तैनात करती है। हिमालय की कठोर परिस्थितियों से लेकर थार रेगिस्तान के गर्म मौसम तक, हेरॉन MK-2 हर परिस्थिति में भारत की आंख और ढाल बनकर काम कर रहा है।









