महाराष्ट्र में SC/ST (अत्याचार निवारण) कानून में बदलाव की खबरों को लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। विधानसभा में चर्चा के दौरान यह सवाल उठे कि क्या राज्य की Devendra Fadnavis सरकार इस कानून में ऐसा संशोधन करने जा रही है, जिससे अब आरोप लगते ही तुरंत गिरफ्तारी न हो और पहले किसी समिति द्वारा जांच की जाए। इस मुद्दे पर विपक्ष और दलित संगठनों ने चिंता जताते हुए इसे कानून को कमजोर करने की कोशिश बताया।
मामला बढ़ने के बाद राज्य के सामाजिक न्याय मंत्री Sanjay Shirsat ने स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि सरकार ने SC/ST एक्ट में किसी भी प्रकार का बदलाव नहीं किया है और न ही ऐसा कोई प्रस्ताव है। उन्होंने कहा कि विधानसभा में दिए गए उनके बयान को गलत तरीके से पेश किया गया, जिससे समाज में भ्रम की स्थिति पैदा हो गई।
शिरसाट ने बताया कि उनका बयान केवल इस बात को समझाने के लिए था कि यह कानून किस तरह लागू किया जाता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि किसी दलित व्यक्ति के साथ अत्याचार या अन्याय होता है तो पहले की तरह ही तुरंत मामला दर्ज होगा, जांच की जाएगी और दोषी पाए जाने पर आरोपी को गिरफ्तार भी किया जाएगा।
मंत्री ने कहा कि कुछ लोग जानबूझकर अफवाह फैलाकर समाज में गलतफहमी पैदा करने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने भरोसा दिलाया कि दलित समुदाय के अधिकारों और सुरक्षा से किसी भी तरह का समझौता नहीं किया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि दलित समाज के लोगों को न्याय दिलाना उनकी जिम्मेदारी है और यदि कहीं भी अन्याय होता है तो लोग सीधे उनसे संपर्क कर सकते हैं। सरकार हर स्थिति में उनके साथ खड़ी रहेगी।









