झारखंड के लातेहार जिले ने खनन राजस्व में एक बार फिर नया कीर्तिमान स्थापित किया है। वित्तीय वर्ष 2025-26 में तय लक्ष्य 755.20 करोड़ रुपये के मुकाबले 1510.86 करोड़ रुपये की वसूली कर यह जिला राज्य में अव्वल रहा। यह उपलब्धि लगातार दूसरे साल है, क्योंकि पिछले वर्ष भी लातेहार ने अपने लक्ष्य 534.51 करोड़ रुपये के मुकाबले 636.69 करोड़ रुपये वसूली कर नया रिकॉर्ड बनाया था। इस शानदार सफलता में कोयला खनन की अहम भूमिका रही। कुल राजस्व में से 607.24 करोड़ रुपये केवल कोयले से आए, जिसमें सीसीएल की मगध परियोजना ने अकेले 445.29 करोड़ रुपये का योगदान दिया। इसके अलावा डीवीसी की तुबेद कोल माइंस और सीसीएल की तेतरियाखांड परियोजना से भी जिले को भारी आय हुई।
कोयले के अलावा अन्य खनिज स्रोतों ने भी राजस्व बढ़ाने में योगदान दिया। रिजर्व प्राइस, पत्थर, ईंट-मिट्टी, मैनेजमेंट फीस और अपफ्रंट पेमेंट जैसी विभिन्न माध्यमों से भी राजस्व जुटाया गया। साथ ही जेएमबीएल सेस के तहत भी जिले ने उल्लेखनीय राशि प्राप्त की, जिससे खजाना और मजबूत हुआ। इस उपलब्धि में सख्त प्रशासनिक कार्रवाई की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही। अवैध खनन के खिलाफ कार्रवाई करते हुए प्रशासन ने करीब 4 करोड़ रुपये का जुर्माना वसूला, 388 वाहनों को जब्त किया और 51 मामले दर्ज किए। साथ ही 54 हजार टन से अधिक अवैध खनिज जब्त कर यह स्पष्ट संदेश दिया गया कि नियमों का उल्लंघन करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। लातेहार की यह लगातार दो साल की उपलब्धि न केवल जिले की खनिज संपदा की शक्ति को दर्शाती है, बल्कि यह सख्त प्रशासनिक कार्रवाई और नियम पालन के महत्व को भी उजागर करती है।









