जलवायु संकट के बीच लद्दाख ने पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास की दिशा में एक मजबूत उदाहरण पेश किया है। यहां भूजल नियंत्रण, ग्लेशियर निगरानी, जल संरक्षण, टिकाऊ पर्यटन और जैविक खेती को जोड़ते हुए एक समग्र वैज्ञानिक मॉडल लागू किया गया है। लेह के संकटग्रस्त क्षेत्रों में भूजल दोहन पर सख्ती करते हुए नए बोरवेल पर रोक लगाई गई है। वहीं, इसरो की मदद से ‘जियो-स्पेशियल लद्दाख’ परियोजना के तहत ग्लेशियरों की सैटेलाइट निगरानी की जा रही है, जिससे संभावित खतरों का समय रहते आकलन संभव हो रहा है।
जल संरक्षण के लिए 800 से अधिक संरचनाएं विकसित की गई हैं, जबकि टी-ट्रेंच परियोजना के जरिए भूजल रिचार्ज को बढ़ावा दिया जा रहा है। साथ ही, प्रदूषण नियंत्रण के लिए होटल और गेस्ट हाउस में सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट को बढ़ावा देकर टिकाऊ पर्यटन को प्रोत्साहित किया जा रहा है। लद्दाख का यह मॉडल पर्यावरण संतुलन, जल संरक्षण और स्थानीय आजीविका को मजबूत करने की दिशा में एक अहम पहल माना जा रहा है।









