विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने अमेरिका और पाकिस्तान के बीच रिश्तों पर टिप्पणी करते हुए कहा कि दोनों देशों का इतिहास रहा है, लेकिन उसे नजरअंदाज करने की भी परंपरा रही है. उन्होंने 2011 में ओसामा बिन लादेन के एबटाबाद में मारे जाने की घटना को याद दिलाते हुए कहा कि तब अमेरिका ने पाकिस्तान को ऑपरेशन से पहले सूचना नहीं दी थी.
जयशंकर ने अमेरिका-पाक रिश्तों की बढ़ती नज़दीकियों पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब देश अपने “सुविधा” के हिसाब से राजनीति करते हैं, तो ऐसी स्थितियां बनती हैं. उन्होंने भारत-अमेरिका संबंधों की मजबूती पर भी जोर दिया और कहा कि भारत अपने फैसले रणनीतिक सोच और भरोसे के आधार पर करता है.
रूस से तेल खरीद पर भारत का पक्ष
रूस से तेल खरीद पर उन्होंने स्पष्ट किया कि यह भारत के राष्ट्रीय हित में है. उन्होंने सवाल उठाया कि जब यूरोप और चीन भी रूस से ऊर्जा खरीद रहे हैं, तो केवल भारत पर ही सवाल क्यों उठते हैं.
पाकिस्तान पर तीसरे पक्ष की मध्यस्थता नहीं
जयशंकर ने साफ कहा कि भारत-पाक रिश्तों में किसी तीसरे देश की मध्यस्थता स्वीकार नहीं की जाएगी — यह नीति भारत पिछले 50 सालों से अपनाता आ रहा है.









